तोता-मैना पुल: बाराबंकी में वफादारी और प्रेम की वो मजार, जहां पक्षियों ने दी थी गवाही

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में स्थित है ऐतिहासिक तोता-मैना पुल। जानें मुगल काल के वजीर, तोते और मैना के त्याग की वो अनोखी कहानी, जिसकी याद में आज भी लगता है मेला।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित तोता-मैना पुल और उनकी मजार आज भी प्रेम, वफादारी और त्याग की एक अनोखी कहानी को जीवित रखे हुए है. अयोध्या से जुड़े इस ऐतिहासिक जिले में कई धार्मिक और रहस्यमयी स्थल मौजूद हैं, जिनमें सतरिख थाना क्षेत्र के सेराय अकबराबाद गांव का यह स्थल अपनी खास पहचान रखता है.

कहा जाता है कि यह पुल मुगल काल में बनवाया गया था और इसके साथ जुड़ी कहानी बेहद दिलचस्प और भावुक है. लोक कथाओं के अनुसार, एक मुगल बादशाह के वजीर का काफिला इस रास्ते से गुजर रहा था, तभी बदमाशों ने हमला कर उन्हें लूट लिया और वजीर की हत्या कर दी. वजीर के साथ पिंजरे में एक तोता और मैना भी थे, जो इंसानों की तरह बोलते थे.

मैना ने बताई बादशाह को पूरी घटना

हमले के दौरान तोते ने बदमाशों को चेतावनी दी कि वह उनकी पहचान बता देगा, जिससे गुस्साए हमलावरों ने उसे मार डाला. वहीं मैना ने चतुराई दिखाते हुए खुद को मृत होने का नाटक किया. बदमाशों के जाने के बाद वह उनके पीछे-पीछे गई और बाद में दिल्ली पहुंचकर बादशाह को पूरी घटना बताई. मैना की गवाही के आधार पर सभी अपराधियों को पकड़कर सजा दी गई.

क्या है तोता-मैन पुल की कहानी?

बताया जाता है कि इसके बाद बादशाह ने उस स्थान पर, जहां वजीर और तोते की मौत हुई थी, उन्हें दफनाने का आदेश दिया. मैना ने भी अपने साथी के साथ दफन होने की इच्छा जताई, जिसे बादशाह ने स्वीकार कर लिया. दोनों की याद में वहां मजार बनवाई गई और पास बहने वाले नाले पर एक मजबूत पुल का निर्माण कराया गया, जिसे आज तोता-मैना पुल के नाम से जाना जाता है.

हर साल लगता है यहां मेला

यह स्थल न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि हर साल यहां लगने वाला मेला भी आस्था और आकर्षण का केंद्र बनता है. दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु यहां आकर मजार पर चादर चढ़ाते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की मन्नत मांगते हैं. सदियों पुरानी यह कहानी आज भी लोगों के दिलों में जीवित है और तोता-मैना पुल को प्रेम और वफादारी की अनोखी मिसाल बनाती है.

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