धनतेरस पर खुली काशी की मां अन्नपूर्णा के खजाने के द्वार, साल में केवल 5 दिन होते हैं दुर्लभ दर्शन
धनतेरस पर काशी में मां अन्नपूर्णा देवी के कपाट खुले। साल में केवल 5 दिन होने वाले दुर्लभ दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़। जानिए पूरी खबर।
धनतेरस के पावन और शुभ अवसर पर बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी यानी वाराणसी से एक बेहद खास और आध्यात्मिक खबर सामने आ रही है। आज धनतेरस के पावन पर्व पर मां अन्नपूर्णा देवी के कपाट श्रद्धालुओं के लिए आधिकारिक रूप से खोल दिए गए हैं। माता के इन कपाटों के खुलने का इंतजार देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को सालभर रहता है, क्योंकि अन्नपूर्णा देवी के दिव्य और दुर्लभ दर्शन वर्ष में केवल पांच दिनों के लिए ही प्राप्त होते हैं। इसकी शुरुआत हर साल धनतेरस के दिन से होती है। ऐसे में देश के कोने-कोने से काशी पहुँच रहे लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह एक अत्यंत विशेष और भावुक अवसर होता है।
🚶♂️ सुबह 5 बजे से शुरू हुए दर्शन; मंदिर मार्ग पर लगी एक किलोमीटर लंबी भक्तों की कतार
श्रद्धालुओं का उत्साह और भीड़ का आलम:
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आधी रात से जुटने लगे भक्त: प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात से ही माता अन्नपूर्णा देवी मंदिर के आसपास सुरक्षा घेरे और बैरिकेडिंग्स के बीच श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं।
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सुबह से उमड़ा उत्साह: आज सुबह पांच बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले, दर्शन के लिए पहुँचे श्रद्धालुओं में एक अलग ही आध्यात्मिक उत्साह देखने को मिला। मंदिर के प्रवेश मार्ग के दोनों तरफ लगभग एक किलोमीटर तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और लोगों ने घंटों अपनी बारी का इंतजार किया।
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खजाने और प्रसाद की प्राप्ति: श्रद्धालुओं का कहना है कि साल में सिर्फ एक बार यह विशेष अवसर आता है, जब उन्हें मां अन्नपूर्णा के दरबार से खजाने के रूप में सिक्के और विशेष प्रसाद प्राप्त होते हैं, जिसके लिए वे किसी भी कठिनाई को झेलने को तैयार रहते हैं।
🛡️ प्रशासनिक मुस्तैदी: कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शांतिपूर्ण तरीके से हो रहे दर्शन
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था:
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बैरिकेडिंग और घेराबंदी: भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने अन्नपूर्णा देवी मंदिर के आसपास कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। मुख्य मार्ग के दोनों ओर मजबूत स्टील के बैरकेड्स और बल्लियां लगाकर घेरे बनाए गए हैं।
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व्यवस्थित प्रवेश: भीड़ को सुचारू रखने के लिए 10-10 मिनट के गैप पर ही दोनों तरफ से सीमित संख्या में लोगों को आगे छोड़ा जा रहा है।
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धक्का-मुक्की से बचाव: यही कारण है कि हजारों की विशाल भीड़ होने के बावजूद मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर किसी भी प्रकार की धक्का-मुक्की या अव्यवस्था की स्थिति पैदा नहीं हुई है। सभी श्रद्धालु पूरी तरह आराम से और शांतिपूर्ण माहौल में माता के दर्शन संपन्न कर रहे हैं।