नंदुरबार की अनोखी परंपरा: 90 किलो का पत्थर उठाओ और पाओ ₹1.10 लाख की नौकरी

महाराष्ट्र के नंदुरबार में अक्षय तृतीया पर अद्भुत परंपरा! 90 किलो का पत्थर उठाकर मजदूर साबित करते हैं अपनी ताकत, मिलता है ₹1.10 लाख तक का सालाना पैकेज।

अक्षय तृतीया के मौके पर जहां देशभर में शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. वहीं महाराष्ट्र के नंदुरबार में इस मौके पर लोग आज भी एक वर्षो पुरानी अनोखी परंपरा का पालन करते हैं. यहां खेतों में काम करने वाले मजदूर का चयन किसी इंटरव्यू या कागजी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि ताकत और सहनशक्ति की परीक्षा से होता है.

नंदुरबार के मालीवाड़ा क्षेत्र में मजदूर बनने के लिए युवाओं को करीब 90 किलो का भारी पत्थर उठाना पड़ता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे पास करने वाले को खेत में काम के साथ बेहतर पैकेज भी मिलता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति सबसे भारी पत्थर उठाने में सफल होता है, वही सबसे सक्षम और मेहनती माना जाता है.

वर्ष भर पहले से तैयारी करते हैं युवा

इस परंपरा में हिस्सा लेने के लिए युवा साल भर पहले से तैयारी करते हैं. वह अपनी ताकत बढ़ाने के लिए खानपान और कसरत पर विशेष ध्यान देते हैं. कई प्रतिभागी डेढ़ मन तक का पत्थर उठाने की कोशिश करते हैं, जो इस परीक्षा में सफल होते हैं. उन्हें मजदूर के साथ-साथ साल भर बेहतर अवसर भी मिलते हैं, जबकि असफल रहने वालों को भी काम मिल जाता है, लेकिन उनका वेतन कम होता है.

होता है साल भर का कॉन्ट्रैक्ट

यह पूरी प्रक्रिया एक तरह से साल भर के कॉन्ट्रैक्ट जैसी होती है. चयन के बाद मजदूर को एक साल के लिए काम दिया जाता है, जिसमें तय पैकेज के तहत नकद पैसे, अनाज और कपड़े शामिल होते हैं. इस साल यह पैकेज लगभग 60 हजार से लेकर 1 लाख 10 हजार रुपये तक पहुंच गया है. इसके अलावा मजदूर को साल में दो जोड़ी कपड़े और जरूरत के मुताबिक छुट्टियां भी दी जाती हैं. छुट्टियों में वह गांव से बाहर भी जा सकता है.

क्यों ली जाती है ये परीक्षा?

ग्रामीणों के अनुसार, यह परंपरा केवल ताकत की परीक्षा नहीं, बल्कि मेहनत, धैर्य और लगन का प्रतीक है. आधुनिक दौर में जहां नौकरी पाने के लिए इंटरव्यू और तकनीकी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं. वहीं नंदुरबार में आज भी परंपरा के जरिए योग्यता का आकलन किया जाता है. यही वजह है कि यह अनोखी परंपरा आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

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