पश्चिम बंगाल: बीजेपी सरकार बनने से खत्म होगा केंद्र से टकराव; मजबूत होगी सुरक्षा
बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद बॉर्डर फेंसिंग, BSF अधिकार क्षेत्र और केंद्रीय एजेंसियों की जांच में आएगा सुधार। केंद्र-राज्य टकराव खत्म होने से बढ़ेगी आंतरिक सुरक्षा।
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद अब राज्य और केंद्र सरकार के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव खत्म होगा.टीएमसी सरकार और केंद्र के बीच टकराव का असर सीमा सुरक्षा और राज्य की कानून व्यवस्था पर पड़ा. जिससे आंतरिक सुरक्षा के लिए कई गंभीर चुनौतियां पैदा हुई. इसमें एक बड़ा मुद्दा बॉर्डर फेंसिंग और उसके लिए भूमि अधिग्रहण का रहा है. ममता सरकार के भूमि अधिग्रहण नहीं करने के चलते बॉर्डर फेंसिंग का मुद्दा लटका रहा.
पश्चिम बंगाल की 2217 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा का एक बड़ा हिस्सा अब भी फेंसिंग रहित है. इसकी वजह से अवैध घुसपैठ, जानवरों की तस्करी और नकली नोटों का अवैध कारोबार करने वालों को मदद मिलती थी. इसके अलावा पर सीमा पर BSF के अधिकार क्षेत्र के विस्तार को 50 किमी करने का नियम भी ममता सरकार के असहयोग के कारण पूरी तरह लागू नहीं हो पाया. बंगाल सरकार ने इसे राज्य के संघीय ढांचे पर हमला बताया था. साथ ही राज्य विधानसभा में इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करके मानने से इंकार कर दिया था.
केंद्र के काम में रुकावट डालती रही थी ममता सरकार
दरअसल, गृह मंत्रालय ने 2021 में एक अधिसूचना जारी कर अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राज्यों पश्चिम बंगाल, पंजाब और असम में BSF का अधिकार क्षेत्र 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी कर दिया था. लेकिन बंगाल सरकार ने इसे पुलिसिंग में दखल माना जिससे सीमा सुरक्षा बल और राज्य पुलिस के बीच समन्वय में कमी आई. बताया जाता है कि इसी वजह से BSF को तलाशी और जब्ती करने में स्थानीय पुलिस का सहयोग नही मिला.
ममता ने घुसपैठ की पहचान और कानूनी प्रक्रिया में गतिरोध पैदा
ममता बनर्जी ने CAA और NRC को लागू करने का भी विरोध किया. ममता ने तो यहां तक कह दिया था कि बंगाल में CAA और NRC को लागू नहीं होने दिया जाएगा. केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के नियम अधिसूचित करते हुए अवैध प्रवासियों की पहचान के निर्देश दिए थे. लेकिन पश्चिम बंगाल के प्रक्रिया शुरू करने और केंद्र सरकार के साथ प्रशासनिक डेटा साझा करने में देरी के चलते घुसपैठ की पहचान और कानूनी प्रक्रिया में गतिरोध पैदा हुआ.
बंगाल की ममता सरकार ने NIA और केंद्रीय एजेंसियों के साथ भी सहयोग नही किया. कई मौकों पर आतंकी घटनाओं की जांच करने गई NIA की टीम को बंगाल पुलिस ने सहयोग नहीं किया. कुछ मामलों में तो केंद्रीय जांच टीमों पर भीड़ द्वारा हमले भी किए गए. राज्य सरकार ने हमेशा ऐसी जांच को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया जिसका असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ा.
चुनावों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच कई बार हुआ टकराव
चुनावों में केंद्रीय बलों की तैनाती पर भी राज्य सरकार और केंद्र के बीच हमेशा टकराव देखने को मिला. 2021 के विधानसभा चुनाव, 2023 के पंचायत चुनाव, 2024 का लोकसभा चुनाव हो या इस बार का विधानसभा चुनाव. राज्य सरकार इसे टालने के लिए बार-बार कोर्ट गई.
अब केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने से केंद्र-राज्य में कोऑर्डिनेशन बेहतर होगा. बॉर्डर फेंसिंग के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आ सकेगी. बीजेपी ने संकल्प पत्र में भी सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए भूमि आवंटित करने का वादा किया है.
बंगाल में डबल इंजन की सरकार को जांच में मिलेगी खुली छूट
बंगाल में डबल इंजन सरकार के चलते केंद्रीय एजेंसियों को जांच में खुली छूट भी मिल सकेगी. अब NIA और केंद्र की अन्य एजेंसियों को बंगाल में आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जरूरी सहयोग और सुरक्षा मिलेगी जिससे आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी. सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए अब राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल साझा अभियान चला सकेंगे. इसका फायदा सीमावर्ती जिलों की डेमोग्राफी में हो रहे बदलावों को रोकने में मिलेगा.