पीजीटी भर्ती में अंकों की छूट पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, 5% छूट का मतलब 5 अंक कम करना नहीं

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पीजीटी भर्ती में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम शैक्षणिक अंकों में मिलने वाली छूट की गणना को लेकर अहम फैसला सुनाया है।

हरियाणा में स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम शैक्षणिक अंकों में मिलने वाली छूट की गणना को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने अर्थशास्त्र विषय के पीजीटी पद पर नियुक्ति की मांग करने वाले अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के अभ्यर्थी महेंद्र सिंह की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले से भर्ती नियमों और अंकों के आकलन को लेकर स्थिति बिल्कुल साफ हो गई है।

📊 कोर्ट ने स्पष्ट किया: ‘5 प्रतिशत छूट’ का मतलब 5 अंक कम करना नहीं

मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों में पाँच प्रतिशत की छूट दिए जाने का अर्थ सीधे तौर पर 5 अंक कम करना नहीं होता है। इसका सही अर्थ निर्धारित कुल अंकों के पाँच प्रतिशत की छूट से है। इस नियम के अनुसार न्यूनतम अर्हक अंक (Qualifying Marks) 47.5 प्रतिशत बनते हैं। याचिकाकर्ता महेंद्र ने अर्थशास्त्र विषय में स्नातकोत्तर (Post Graduation) की डिग्री 46 प्रतिशत अंकों के साथ प्राप्त की थी, जो निर्धारित छूट के बाद भी आवश्यक पात्रता मापदंड को पूरा नहीं करती थी।

🚫 याचिका खारिज: निर्धारित पात्रता मानदंडों पर खरा उतरना अनिवार्य

याचिकाकर्ता द्वारा चयन प्रक्रिया में राहत की मांग की गई थी, परंतु अदालत ने नियमों की सही व्याख्या करते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। न्यायालय के इस निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि सरकारी शिक्षक भर्तियों में विज्ञापित शैक्षणिक योग्यता और अंकों के प्रतिशत के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा, जिससे भविष्य की अन्य नियुक्तियों के लिए भी एक स्पष्ट न्यायिक दृष्टांत मिल गया है।

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