प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद हत्याकांड के बाद नाहरी गांव में महापंचायत, एनकाउंटर की मांग पर अड़े परिजन

दिल्ली के बांकनेर में प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद की हत्या के बाद नाहरी गांव में पंचायत। परिजनों ने की आरोपियों के एनकाउंटर की मांग।

सोनीपत: दिल्ली के गांव बांकनेर में जिम के बाहर प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद की हत्या के बाद उनके पैतृक गांव नाहरी में पंचायत हुई. पंचायत में नाहरी, नाहरा, बांकनेर और आसपास के गांवों के लोग शामिल हुए. परिजनों और ग्रामीणों ने पंचायत में हत्यारों के एनकाउंटर की मांग उठाई और एनकाउंटर होने तक प्रमोद का शव नहीं लेने का फैसला किया.

परिजनों ने लगाई न्याय की गुहार: प्रमोद के बड़े भाई का दर्द भी कैमरे के सामने छलक पड़ा. रोते हुए उन्होंने सरकारों पर भरोसा नहीं होने की बात कही और सिर्फ योगी बाबा से न्याय की उम्मीद जताई. पंचायत में परिवार की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा और ग्रामीणों ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए.

नाहरी गांव का रहने वाला था प्रमोद: पंचायत में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि प्रमोद की हत्या महज एक वारदात नहीं, बल्कि परिवार के लिए ऐसा जख्म है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. प्रमोद सोनीपत के नाहरी गांव का रहने वाला था. प्रॉपर्टी डीलिंग के साथ वो गांव में मुकुल नाम से वाटिका भी चलाता था.

परिजनों और ग्रामीणों ने की पंचायत: ग्रामीणों के मुताबिक, प्रमोद बेहद मिलनसार था और समाजसेवा के कामों में हमेशा आगे रहता था. गांव के लोगों का कहना है कि जरूरत के वक्त प्रमोद हर किसी के साथ खड़ा रहता था. यही वजह है कि उसकी मौत के बाद पूरे गांव में मातम के साथ गुस्सा भी दिखाई दे रहा है. प्रमोद अपने पीछे परिवार और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है. फिलाहल ग्रामीणों ने पंचायत कर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की.

परिवार को भी सुरक्षा मुहैया कराने की मांग: प्रमोद के बड़े भाई ने कहा कि अब उन्हें केंद्र और राज्य सरकारों पर भरोसा नहीं है. उन्होंने सिर्फ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हीं से न्याय की उम्मीद है. वहीं ग्रामीणों ने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है. ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह प्रमोद की हत्या को अंजाम दिया गया, उसके बाद परिवार को भी खतरा बना हुआ है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि परिवार को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराई जाए और गांव में भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए.

दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल: वहीं पंचायत में दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी साफ दिखाई दी. परिजनों का आरोप है कि वारदात के बाद जब उन्होंने पुलिस से संपर्क करने के लिए फोन किया, तो उनका फोन तक नहीं उठाया गया. वहीं पोस्टमार्टम के दौरान अस्पताल में भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई, लेकिन प्रमोद के घर और परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस की कोई तैनाती नहीं की गई.

आरोपियों के एनकाउंटर की मांग: ग्रामीणों का कहना है कि परिवार को सुरक्षा की जरूरत है, ऐसे में घर के आसपास पुलिसकर्मी तैनात किए जाने चाहिए थे. परिजनों का यह भी आरोप है कि आज शव लेने को लेकर दिल्ली पुलिस की तरफ से परिवार से कोई संपर्क नहीं किया गया. इन्हीं मुद्दों को लेकर पंचायत में ग्रामीणों ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और परिवार की सुरक्षा के साथ-साथ पुलिस से आरोपियों के एनकाउंटर की मांग की है.

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