बच्ची के पैरों के नीचे धंसा बस का फर्श, आरटीओ और स्कूल प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल
तोशाम में निजी स्कूल बस का फर्श टूटने से बच्ची टायरों के बीच फंसी। बस का बीमा 2014 से एक्सपायर, लोगों में भारी गुस्सा।
तोशाम। सुबह करीब आठ बजे मैं अपनी दोनों बच्चियों को घर की गली के कॉर्नर पर बनी दुकान के आगे बस में बैठाकर लौट ही रहा था कि अचानक चीखने की आवाज सुनी। मैंने मुड़कर देखा तो लगा बस में कोई जानवर घुस गया है। तभी धीमी गति से चल रही बस एकाएक रुकती है। मैं भी दौड़कर बस के पास पहुंचा। दुकान से तकरीबन 40-50 मीटर की दूरी पर बस थी। मैं बस के अंदर घुसा। बच्चे व एक-दो शिक्षक डरे हुए से खड़े थे। पीछे की सीट पर बैठी बड़ी बच्ची पाविका बहुत डरी और चिल्ला रही थी। मैं उसकी ओर बढ़ा…आगे का मंजर देखा तो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई…। निजी स्कूल बस के टूटे फर्श से गिरी मासूम बच्ची के पिता सुमित मेहता यह बताते हुए भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे थे कि उनकी बेटी की जान बच गई। साथ ही सोए हुए सिस्टम को कोस रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शी रवि बंसल ने बताया कि निजी स्कूल संचालक बच्चों से परिवहन फीस के नाम पर मोटी राशि लेते हैं लेकिन बसों की हालत पर ध्यान नहीं देते। बाहर से रंग-रोगन करवाकर यूं दिखाते हैं जैसे बस नई है लेकिन अंदर सीटों और फर्श की स्थिति खटारा बस जैसी होती है। अमित ने कहा कि बस की यह हालत एक ही दिन में ऐसी नहीं हुई है। चालक को पता था तो फिर ऐसी बस को क्यों चलाया जा रहा था। चालक ने स्कूल प्रबंधन को बताया था तो फिर रूट से क्यों नहीं हटाया। इस संबंध में स्कूल के एमडी प्रदीप से बात करने की कोशिश की गई तो उनके भाई संजय ने बताया कि प्रदीप की अभी तबीयत खराब है, वे बात करने की स्थिति में नहीं है।