भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: जींद में ट्रायल अंतिम चरण में, जल्द होगी शुरू
भारत की पहली प्रदूषण मुक्त हाइड्रोजन ट्रेन का सपना जल्द होगा सच! जींद-सोनीपत रूट पर ट्रायल अंतिम चरण में। जानें कब से शुरू हो सकता है नियमित संचालन।
जींद: भारत की पहली अत्याधुनिक और प्रदूषण मुक्त हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन अब बेहद करीब पहुंच गया है. रेलवे के अनुसार ट्रेन का ट्रायल अंतिम चरण में है और अगले 10 से 12 दिनों में परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है. इसके बाद आरडीएसओ की मंजूरी मिलते ही ट्रेन का नियमित संचालन शुरू किया जाएगा.
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सपना जल्द होगा पूरा: देश की पहली हाइड्रोजन आधारित और प्रदूषण मुक्त ट्रेन जल्द ही रेलवे ट्रैक पर दौड़ती नजर आ सकती है. रेलवे विभाग इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है और ट्रेन का ट्रायल अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है. यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो जल्द ही देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन की सौगात मिल सकती है.
जींद पहुंचे दिल्ली मंडल के DRM: शुक्रवार को दिल्ली मंडल के डीआरएम पुष्पेश त्रिपाठी विशेष ट्रेन से प्रशासनिक और रेलवे अधिकारियों की टीम के साथ जींद जंक्शन पहुंचे. उन्होंने स्टेशन परिसर, हाइड्रोजन प्लांट और स्टेडियम स्थित हेलीपैड का निरीक्षण किया. इस दौरान अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए ताकि ट्रेन के संचालन से पहले सभी तैयारियां समय पर पूरी हो सकें.
सोनीपत-जींद रूट पर हो चुका है स्पीड ट्रायल: डीआरएम पुष्पेश त्रिपाठी ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल काफी एडवांस स्टेज पर है. सोनीपत-जींद रेलखंड पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्पीड ट्रायल किया जा चुका है. इसके अलावा दिल्ली-सोनीपत और जींद-दिल्ली रेलमार्ग का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है ताकि भविष्य में संचालन के सभी विकल्प तैयार रहें.
PM मोदी कर सकते हैं उद्घाटन: रेलवे सूत्रों के अनुसार, भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के नियमित संचालन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराई जा सकती है. हालांकि, रेलवे की ओर से उद्घाटन की तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
पर्यावरण के लिए होगी बड़ी उपलब्धि: हाइड्रोजन ट्रेन को पारंपरिक डीजल ट्रेनों का पर्यावरण अनुकूल विकल्प माना जा रहा है. इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा. भारत के लिए ये परियोजना रेलवे के आधुनिकीकरण और ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.