भिवानी: बिजली संकट गहराया, कर्मचारियों की कमी और बढ़ते लोड से लोग परेशान

भिवानी में बिजली व्यवस्था बदहाल। स्टाफ की कमी से शिकायतें समय पर हल नहीं हो पा रही हैं। बढ़ते बिजली लोड और ट्रांसफार्मर ट्रिपिंग से उपभोक्ता बेहाल। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

भिवानी। शहर की बिजली व्यवस्था इन दिनों तीन शिफ्ट में दो-दो लाइनमैन के भरोसे चल रही है। फील्ड कर्मचारियों की लगातार घटती संख्या के कारण उमस भरी गर्मी में बिजली संबंधी शिकायतों के समय पर निस्तारण का संकट गहराता जा रहा है। बिजली निगम के शिकायत निवारण केंद्र पर रोजाना 100 से 150 शिकायतें पहुंचती हैं मगर शहरी फीडरों पर एक शिफ्ट में केवल दो लाइनमैन ही तैनात रहते हैं। यदि कोई कर्मचारी बीमार पड़ जाए या अवकाश पर चला जाए तो पूरे क्षेत्र का जिम्मा एक ही लाइनमैन के कंधों पर आ जाता है।

बिजली निगम की आपातकालीन सेवाएं चौबीसों घंटे तीन शिफ्ट में संचालित होती हैं। प्रत्येक शिफ्ट में केवल दो कर्मचारी तैनात रहते हैं। इनके जिम्मे करीब 30 किलोमीटर क्षेत्र की बिजली आपूर्ति सुचारु रखना और शिकायतों का समाधान करना होता है। ऐसे में एक साथ कई स्थानों से शिकायत आने पर कर्मचारियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है।
अकेले ऑपरेशन सिटी सब डिविजन, भिवानी की बात करें तो यह पुराने शहर क्षेत्र की बिजली आपूर्ति और रखरखाव का जिम्मा संभालता है। यहां लाइनमैन के 20 स्वीकृत पद हैं लेकिन केवल 12 लाइनमैन कार्यरत हैं। आठ पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। सहायक लाइनमैन के 34 स्वीकृत पदों में केवल दो नियमित सहायक लाइनमैन हैं जबकि 22 सहायक लाइनमैन एचकेआरएन के माध्यम से कार्यरत हैं। यानी फील्ड कर्मचारियों की लगभग 50 प्रतिशत संख्या ही बची है। यह स्थिति केवल एक सब डिविजन की नहीं बल्कि पूरे बिजली निगम की व्यवस्था की तस्वीर बयां करती है।

शिकायत दर्ज कराने में भी आ रही परेशानी
बिजली निगम ने शिकायत दर्ज कराने के लिए दो हेल्पलाइन नंबर 9812063033 और 9812063035 जारी किए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि चौबीसों घंटे इन नंबरों पर कॉल करने पर अधिकतर एक ही संदेश सुनाई देता है कि जिस नंबर से संपर्क करना चाहते हैं वह अभी व्यस्त है। ऐसे में बिजली गुल होने पर लोग बार-बार फोन मिलाते रहते हैं लेकिन शिकायत दर्ज कराने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पिछले साल के मुकाबले डेढ़ गुना बढ़ गया बिजली लोड
भिवानी सर्कल में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष बिजली लोड करीब डेढ़ गुना बढ़ गया है। पिछले वर्ष बिजली की अधिकतम खपत करीब 600 मेगावाट थी जबकि इस वर्ष जुलाई तक यह बढ़कर 958 मेगावाट पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी की संभावना है। बढ़ते लोड के कारण गली-मोहल्लों में लगे छोटे ट्रांसफार्मरों से लेकर पावर सब स्टेशनों के बड़े ट्रांसफार्मर तक ओवरलोड हो रहे हैं। रोजाना किसी न किसी पावर सब स्टेशन का ट्रांसफार्मर ट्रिप हो रहा है जिसे दोबारा चालू करने में दो से तीन घंटे लग जाते हैं। वहीं 200 केवी क्षमता के कई ट्रांसफार्मर जलकर भी खराब हो रहे हैं।

निगम को उपभोक्ताओं के वास्तविक लोड की नहीं मिल रही जानकारी
बिजली कनेक्शन लेने के बाद अधिकांश उपभोक्ता अपनी बढ़ी हुई बिजली खपत के अनुसार लोड नहीं बढ़वाते। इससे निगम के पास किसी क्षेत्र में वास्तविक बिजली लोड बढ़ने की सटीक जानकारी नहीं पहुंच पाती। निगम समय-समय पर लोगों को स्वैच्छिक लोड घोषणा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के प्रति जागरूक भी करता है। इसके बावजूद घरों और प्रतिष्ठानों में लगातार नए बिजली उपकरणों का उपयोग बढ़ रहा है जिससे अतिरिक्त भार बिजली लाइनों और ट्रांसफार्मरों पर पड़ रहा है। यही कारण है कि फॉल्ट बढ़ रहे हैं और ट्रांसफार्मर भी जवाब दे रहे हैं।

निगम का पिछले साल के मुकाबले इस साल करीब डेढ़ गुना बिजली लोड बढ़ गया है। फिलहाल 958 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। इसकी वजह से पावर सब स्टेशनों से लेकर लाइनों पर लगे छोटे बिजली ट्रांसफार्मरों में भी दिक्कत आ रही है। निगम के पास मैनपावर पहले के मुकाबले काफी कम है। इसके बावजूद समय रहते शिकायतों के निस्तारण का प्रयास किया जा रहा है।
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