मनीषा हत्याकांड: भिवानी महापंचायत में फैसला; पिता 29 जून से बैठेंगे आमरण अनशन पर

लेडी टीचर मनीषा मौत मामले में भिवानी में महापंचायत। पिता संजय 29 जून से DC दफ्तर के बाहर करेंगे आमरण अनशन। सरकार को 21 दिन का अल्टीमेटम।

भिवानी 07 जून 2026 : भिवानी में लेडी टीचर मनीषा की मौत के मामले में उनके पिता संजय ने आमरण अनशन पर बैठने का ऐलान किया है। रविवार को ढाणी लक्ष्मण गांव में आयोजित महापंचायत में संजय ने कहा, “मैं अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए DC कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठूंगा। मैं आम लोगों से अपील करता हूं कि इस न्याय की लड़ाई में मेरी मदद करें।”
मामले को लेकर गठित संघर्ष समिति ने सरकार को 21 दिन का अल्टीमेटम दिया है। समिति का कहना है कि यदि तय अवधि के भीतर न्याय नहीं मिला तो 29 जून से DC कार्यालय के बाहर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
पिछले साल 13 अगस्त को मनीषा की डेडबॉडी मिली थी। परिवार ने हत्या के आरोप लगाए थे। इस मामले की जांच CBI कर रही है।
मनीषा के पिता संजय ने बताया था कि उनकी बेटी 11 अगस्त 2025 को प्ले स्कूल में ड्यूटी पर गई थी। इसके बाद वह नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन के लिए जाने की बात कहकर घर से निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी। दो दिन बाद, 13 अगस्त को उसका शव गांव सिंघानी के खेतों में मिला था।
घटना के बाद परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया, जिस पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। मनीषा को न्याय दिलाने के लिए लोगों ने धरना-प्रदर्शन भी किया। हालांकि, 18 अगस्त को पुलिस ने मामले को आत्महत्या करार दिया। इसके बाद लोगों का विरोध और तेज हो गया। बढ़ते आंदोलन को देखते हुए मनीषा का तीसरी बार दिल्ली एम्स में पोस्टमॉर्टम कराया गया और मामले की जांच CBI को सौंप दी गई।
महापंचायत में कमेटी के सदस्य मेवा सिंह आर्य ने कहा, “हमें यह संकल्प लेना होगा कि मनीषा को अपनी बेटी मानकर उसे न्याय दिलाएं। हम शुरू से ही संवैधानिक तरीके से यह लड़ाई लड़ रहे हैं। आज पूरे हरियाणा से विभिन्न खापों के प्रतिनिधि यहां पहुंचे हैं। कमेटी ने सरकार को 21 दिन का समय देने का फैसला किया है। यदि इस अवधि में न्याय नहीं मिला तो 29 जून से भिवानी स्थित DC कार्यालय के बाहर अनशन शुरू किया जाएगा।
आगे की रणनीति के लिए 15 मेंबरी कमेटी बनाई
आगे की रणनीति तय करने और न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए 15 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी में सतबीर प्रधान, आजाद सिंह भूनना, धर्मवीर सिंह (पूर्व बीडीसी, बुढ़डा), प्रवीण, राजवीर सरपंच, शिंभूराज सरपंच (ढाणी लक्ष्मण), हरदयाल सरपंच, भलेराम, अनूप, ईश्वर, रघुवीर नंबरदार, राजू सरपंच, मेवा सिंह आर्य, महावीर सरपंच और मास्टर रामकुमार को शामिल किया गया है।
पूर्व विधायक ओमप्रकाश गोरा ने कहा- मनीषा मामले को लेकर पहले भी महापंचायत हो चुकी है। प्रदेश सरकार इस मामले में लीपापोती कर रही है, जो उचित नहीं है। हमारी मांग है कि सरकार मामले को दबाने के बजाय पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का काम करे। मामले की जांच CBI को सौंपी जा चुकी है, इसलिए जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंचनी चाहिए। अभी तक जांच में कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है।
11 अगस्त को लापता हुई, 13 को लाश मिली
मनीषा के पिता संजय ने बताया था कि उनकी बेटी 11 अगस्त 2025 को प्ले स्कूल में ड्यूटी पर गई थी। इसके बाद वह नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन के लिए जाने की बात कहकर घर से निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी। दो दिन बाद, 13 अगस्त को उसका शव गांव सिंघानी के खेतों में मिला था।
घटना के बाद परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया, जिस पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। मनीषा को न्याय दिलाने के लिए लोगों ने धरना-प्रदर्शन भी किया। हालांकि, 18 अगस्त को पुलिस ने मामले को आत्महत्या करार दिया। इसके बाद लोगों का विरोध और तेज हो गया। बढ़ते आंदोलन को देखते हुए मनीषा का तीसरी बार दिल्ली एम्स में पोस्टमॉर्टम कराया गया और मामले की जांच CBI को सौंप दी गई।

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