यमुनानगर तिहरा हत्याकांड: जेल अधीक्षक की अग्रिम जमानत खारिज, बढ़ी मुश्किलें

यमुनानगर तिहरे हत्याकांड में बड़ा खुलासा। STF ने जेल अधीक्षक विशाल छिब्बर को आरोपी बनाया। काला राणा को मोबाइल मुहैया कराने का आरोप, जमानत याचिका खारिज।

यमुनानगर: खेड़ी लक्खा सिंह पुलिस चौकी के पास हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच में एस.टी.एफ. करनाल ने बड़ा खुलासा किया है। एस.टी.एफ. की ओर से अदालत में दाखिल चार्जशीट में तत्कालीन जेल अधीक्षक विशाल छिब्बर और हैड वार्डर दीप चंद का नाम शामिल किया गया है। दोनों पर जगाधरी जेल में बंद कुख्यात बदमाश काला राणा को मोबाइल फोन उपलब्ध कराने तथा इसके बदले आर्थिक लाभ और महंगे उपहार लेने के आरोप लगाए गए हैं। मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए विशाल छिब्बर ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी जिसे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने उन्हें 10 जून को जे.एम.आई.सी. पीयूष चौधरी की अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं। वहीं हैड वार्डर दीप चंद ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है।

गौरतलब है कि 26 दिसम्बर 2024 को हुए तिहरे हत्याकांड में शामली निवासी पंकज मलिक, गोलनी निवासी वीरेंद्र राणा और उन्हेड़ी निवासी अर्जुन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि इस वारदात की साजिश जगाधरी जेल में बंद बदमाश काला राणा ने रची थी। उसने जेल से ही विदेश में बैठे अपने भाई नोनी राणा और गुर्गे सन्नी सलेमपुर के संपर्क में रहकर हत्याकांड को अंजाम दिलाया।

एस.टी.एफ. अनुसार जांच में बैंक रिकॉर्ड से 33,040 रुपए के महंगे जूते खरीदने और एक राडो घड़ी जेल अधीक्षक तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले हैं। मोबाइल की लोकेशन भी जेल परिसर में मिली। एस.टी.एफ. इंचार्ज दिपेंद्र ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि विशाल छिब्बर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि वह अदालत में तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रखेंगे।

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