रवि किशन के पर्सनैलिटी राइट्स पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने रवि किशन की सहमति बिना उनके नाम और छवि के इस्तेमाल पर रोक लगाई। गूगल, मेटा और X को आपत्तिजनक AI कंटेंट हटाने का निर्देश।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद रवि किशन के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा करते हुए सोशल मीडिया से तुरंत अनधिकृत कंटेंट हटाने का आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने मानहानि करने वाली या अश्लील सामग्री के प्रकाशन पर भी रोक लगा दी है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स Google, Meta और X Corp जैसी कंपनियों को 72 घंटों के भीतर संबंधित वेब लिंक हटाने का निर्देश भी दिया.

जस्टिस ज्योति सिंह ने रवि किशन की छवि का इस्तेमाल करके या उनकी पर्सनैलिटी का जिक्र करके किसी भी तरह की गलत या अश्लील चीज के पब्लिकेशन पर रोक लगा दी है. साथ ही सोशल मीडिया इंटरमीडियरी गूगल, मेटा और X कॉर्प को यह भी निर्देश दिया कि अगर उन्हें अपलोड करने वाली एंटिटी और लोग तथा डोमेन नेम रजिस्ट्रार कोर्ट का 2 जुलाई का आदेश मिलने के अगले 3 दिन के अंदर इसे नहीं हटाते हैं, तो ये संबंधित कंपनी 72 घंटे के अंदर ऐसे कंटेंट के वेब लिंक को हटा दें.

सहमति के बिना व्यावसायिक इस्तेमाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने रवि किशन की ओर से दायर एक मुकदमे में अंतरिम आदेश पारित किया, जिसमें उनके व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा और वेबसाइटों और सोशल मीडिया पर AI-जनरेटेड अश्लील और अपमानजनक सामग्री के प्रसार के खिलाफ निर्देश मांगे गए थे.

रवि किशन की ओर से बताए गए अन्य कंटेंट में इश्क 104.8 FM पर ‘व्हाट इज लव विद कवि किशन’ नामक एक रेडियो सेगमेंट था. उन्होंने तर्क दिया कि इस सेगमेंट ने उनके नाम, छवि और समानता का उनकी सहमति के बिना व्यावसायिक मकसद के लिए उपयोग करके उनके अधिकारों का उल्लंघन किया.

15 अक्टूबर को कोर्ट में अगली सुनवाई

एक्टर और सांसद ने अपनी शिकायत में कहा कि उनकी नकली नकल वाला एक AI-जनरेटेड वीडियो भी इश्क FM के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पाया जा सकता है. कोर्ट ने अब इश्क 104.8 FM के मालिक, क्रिएटिव चैनल एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड, जिसे मनोरंजन टीवी नेटवर्क भी कहा जाता है, के खिलाफ निषेधाज्ञा आदेश जारी किया है.

रवि किशन के व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन करने वाले पाए गए कंटेंट को हटाने का अंतरिम आदेश कई अन्य पक्षों पर भी लागू होता है, जिसमें जॉन डूज (अज्ञात शख्स) शामिल हैं, और उसे ऐसी सामग्री अपलोड करते पाया गया है. दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को करेगा.

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