राज्यसभा में बोले AAP सांसद राघव चड्ढा- ‘पेपर लीक कैंसर जैसा, मीडिया बाइट नहीं इंस्टीट्यूशनल सॉल्यूशन चाहिए’
राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक कैंसर जैसी बीमारी है, जिसका इलाज कड़े संस्थागत सुधारों से ही संभव है।
आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा गुरुवार को पहली बार सदन में बोलते दिखे। इस दौरान उन्होंने पेपर लीक रोकने वाले बिल पर उच्च सदन में हुई बहस के दौरान अपना पक्ष रखा और पेपर लीक की तुलना कैंसर जैसी बीमारी से करते हुए कहा कि इसका समाधान मीडिया में दिए बयानों से नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की समस्या के हल के लिए एक संस्थागत समाधान की जरूरत है, जिसे सरकार इस बिल के जरिए ला रही है।
पंजाब के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने कहा, ‘सर पेपर लीक जैसी गंभीर बीमारी का परमानेंट इलाज करना होगा, जैसे कैंसर का इलाज क्रोसिन खिलाकर नहीं किया जा सकता, ठीक वैसे ही पेपर लीक जैसी समस्या का इलाज मीडिया साउंड-बाइट से नहीं बल्कि इंस्टीट्यूशनल सॉल्यूशन से होगा, जो आज हमारी सरकार इस बिल के माध्यम से करने जा रही है। जो कि भारत का पहला एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क है।’Jaga
NEET छात्रों के साथ जताई सहानुभूति
आगे उन्होंने कहा, ‘मैं सबसे पहले NEET के स्टूडेंट्स से कुछ कहना चाहूंगा, आपका गुस्सा जस्टिफाइड है, आपका दर्द असली है और आपको परीक्षा प्रणाली से जो शिकायत है, वह भी जेन्यून है। आपकी आवाज मायने रखती है। और जब आपने अपनी चिंता व्यक्त करी, अपना दर्द बताया, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने केवल प्रधानमंत्री के रूप में ही नहीं बल्कि एक अभिभावक के रूप में आपकी बात को सुना। परिवार के मुखिया की तरह उस बात को सुना। स्टूडेंट्स ने मांग करी, प्रधानमंत्री ने एक्ट किया, ऐतिहासिक फैसला हुआ, सिस्टम बदल गया।’
‘एक स्टूडेंट अकेला NEET की तैयारी नहीं करता’
आगे उन्होंने कहा, ‘जब एक स्टूडेंट NEET परीक्षा की तैयारी करता है, तो वह अकेला तैयारी नहीं करता, उसका पूरा परिवार तैयारी करता है। मां अपनी छोटी-छोटी जरूरतें रोक देती है, घर का बजट कम करती है, पिता फैमिली की सेविंग्स को कोचिंग फीस और रेंट पर खर्च करता है। फैमिलीज को लोन तक लेना पड़ता है। और स्टूडेंट खुद कोटा, जयपुर, चंडीगढ़, दिल्ली, पटना जैसे शहरों में जाकर घर से दूर रहता है, दिन में 18-18 घंटे पढ़ाई करता है, रात में 2 बजे तक पढ़ाई करता है और फिर अलार्म लगाकर सुबह 5 बजे क्लासेस के लिए उठ जाता है।’
‘छात्र अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए तैयारी करता है’
आगे नीट स्टूडेंट की कठिन तैयारी का जिक्र करते हुए चड्ढा ने कहा, ‘परिवार से दूर, कोई सोशल लाइफ नहीं, कोई त्योहार नहीं, सोशल मीडिया और दोस्तों से दूर, अपनी नींद और स्वास्थ्य से भी समझौता करता है, क्योंकि उसे पता है कि जब वह पेपर लिखेगा तो वह सिर्फ पेपर नहीं बल्कि अपने परिवार के लिए एक बेहतर भविष्य लिखने जा रहा है। फिर एक दिन परीक्षा की तारीख पर उसे पता चलता है कि वह तीन साल से जिस पेपर की तैयारी कर रहा था, वह पेपर पहले ही किसी ने पहले ही पेपर देकर हासिल कर लिया और पेपर लीक हो गया।’
‘सरकार ने स्टूडेंट्स की बात को सुना और करके भी दिखा दिया’
आगे उन्होंने कहा कि वे भी स्टूडेंट्स की तकलीफ को समझते हैं, क्योंकि वे भी एक ऐसी ही परीक्षा की तैयार कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘ऐसी स्थिति में जब पेपर लीक होता है तो सिर्फ पेपर ही लीक नहीं होता, बल्कि उस स्टूडेंट की मेहनत, उसके सपने, उसका आत्मविश्वास, उसका भरोसा, उसकी प्रेरणा सब लीक हो जाती हैं, साथ ही उसकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ता है। मैं उस तकलीफ को समझता हूं, क्योंकि कुछ साल पहले तक मैं भी चार्टर्ड अकाउंटेंसी का स्टूडेंट रहा हूं। और क्योंकि मैं लंबे समय से इस सदन का सदस्य रहा हूं, इसलिए मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ इस बात को कहना चाहता हूं कि जब बात स्टूडेंट्स और देश के युवाओं की आई, तो सरकार ने सुना, सरकार ने ऐक्शन लिया और सरकार ने करके भी दिखा दिया।’