रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी पर गरमाई राजनीति: RDA के 38 इमारतों को गिराने के आदेश पर सपा का हल्ला बोल

रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के RDA के आदेश के खिलाफ सपा हमलावर है। माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रामपुर में धरना देगा और DM को ज्ञापन सौंपेगा। पूरी खबर पढ़ें।

उत्तर प्रदेश में जौहर यूनिवर्सिटी पर सियासी बवाल जारी है. सपा का 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज रामपुर जाएगा. इस नेतृत्व नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय करेंगे. जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोकने की मांग करेंगे. इसके लिए धरना देंगे. जिलाधिकारी रामपुर को ज्ञापन सौंपा जाएगा. प्रतिनिधिमंडल में वर्तमान विधायक के साथ-साथ पूर्व विधायक भी शामिल हैं. बता दें कि जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 2006 में हुई थी और इसके संस्थापक समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान हैं.

जिला प्रशासन रामपुर द्वारा इस पर बुलडोजर एक्शन की कार्यवाही की जा रही है. इसको लेकर सपा नेता नाराज हैं और आजम खान को सपोर्ट करने के लिए रामपुर जा रहे हैं. सपा का कहना है कि यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलाना शैक्षिक ढांचे और ‘शिक्षा के अधिकार’ को ध्वस्त करने जैसा है. यह संवैधानिक भावना के विपरित है. प्रशासन और सरकार का यह कदम समाज के गरीब, पिछड़े और दलित वर्गों को शिक्षा से वंचित करने जैसा है. यहां से नाम मात्र की फीस पर सभी धर्मों के लोग शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.

सपा डेलीगेशन में 28 सदस्यीय, विधायक-पूर्व MLA शामिल

 

Sp Delegation

जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतें गिराने का आदेश

रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया है. अधिकारियों का कहना है कि इन 38 इमारतों को बनाने से पहले सरकारी नियम के मुताबिक नक्शा पास नहीं कराया गया था. यह फैसला ‘उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973’ के तहत लिया गया है. इसके मुताबिक बिना मंजूरी के बने निर्माण अवैध माने जाते हैं. आदेश जारी करने से पहले प्रशासन ने यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट को नोटिस भेजकर उनका पक्ष जानना चाहा था.

वहीं, यूनिवर्सिटी का कहना है कि इमारतें पहले ही बन चुकी थीं, इसलिए मौजूदा नियमों के तहत उन्हें अवैध नहीं ठहराया जा सकता. उस समय यह RDA के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था, इसलिए उससे भवन निर्माण की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं थी. हालांकि, प्राधिकरण ने कहा कि निर्माण के समय जिस सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेना जरूरी था, उसकी अनुमति अनिवार्य थी.

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