संत रविदास समरसता अभियान पर चर्चा के दौरान भड़का विवाद, स्पीकर ने बयान कार्यवाही से हटाया
हरियाणा विधानसभा के मॉनसून सत्र में कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल की टिप्पणी पर हंगामा। ब्राह्मण समाज पर दिए बयान को लेकर उठी माफी की मांग।
चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन गुरु रविदास जी महराज समरसता अभियान को लेकर चर्चा हुई. इस दौरान कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने गुरु रविदास जी महाराज समरसता संकल्प अभियान पर आए सरकारी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान ब्राह्मण समाज पर कुछ ऐसी टिपण्णी कर दी जिसको लेकर हंगामा हो गया.
ब्राह्मणों पर गीता भुक्कल की टिप्पणी पर हंगामा: गीता भुक्कल ने कहा “ब्राह्मण ना पूजिये जो होंवे गुणहीन, पूजिये चरण चांडाल के जो होवे गुण परवीन.” गीता भुक्कल की इस टिप्पणी पर सत्तापक्ष के विधायकों ने नाराजगी जताकर माफी मांगने की मांग की. इस पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ. हालांकि स्पीकर ने उनके इस बयान को सदन की कार्यवाही से हटा दिया.
बीजेपी विधायकों ने माफी की मांग: इस मामले को लेकर कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा कि हमारी पार्टी और हमारे नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी महापुरुषों का सम्मान करते हैं. वहीं इस मामले को लेकर कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा ने कहा कि “सीएम ने प्रस्ताव रखा. संत श्री शिरोमणि रविदास जी का 650वें प्रकाश पर्व हम मनाने जा रहे हैं. यह एकता का, समरसता का हर भेदभाव को भुलाकर के जाति पाति से ऊपर उठकर के उसका भाव देश में है. जो गुरु रविदास जी की शिक्षाएं हैं. उनको आगे बढ़ाने के भाव से हमने चर्चा की. यह तो सब कहते हैं, जन्म से नहीं कर्मों से आदमी विद्वान होता है, लेकिन किसी जाति के बारे में निशाना साधना उसकी हम सबने निंदा कि सदन ने भी माना और स्पीकर ने भी उसको हटवाया. ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए.”
गीता भुक्कल ने जानें क्या कहा: जब गीता भुक्कल से इस पर बात कि गई तो उन्होंने कहा कि “श्री गुरु राविदास जी की जयंती मनाने को लेकर एक संकल्प पत्र आया. जिस पर शुरू में ही कह दिया गया कि हम इसका पूरी तरह से समर्थन करते हैं. हमने यह भी जानना चाह कि क्या चुनाव की वजह से यह आप पंजाब, हरियाणा और यूपी में ले जा रहे हैं, क्योंकि संत शिरोमणि रविदास जी ने तो अच्छी शिक्षा की बात की, मीरा जी भी उनकी शिष्या थीं, उन्होंने महिला शिक्षा की बात की, उन्होंने असमानता खत्म करने की बात की, उन्होंने तो कहा कि मन चंगा तो कटौती में गंगा, ऐसा चहुं राज मैं जहां सभी को मिले अन्न, 650 साल बाद भी लोगों की मानसिकता बदली नहीं है. कोई भी व्यक्ति अपने कर्म से ऊंच या नीचा होता है, जन्म से नहीं होता.” उन्होंने फिर सदन में दिए अपने व्यक्तव्य को दोहराया. हालांकि उन्होंने कहा कि “मैंने इस शब्द को वापस भी ले लिया. हमारे लिए ब्राह्मण समाज आदरणीय है पूजनीय हैं.”