सरकारी कर्मचारियों को लोन लेने के लिए देनी होंगी 24 जानकारियां, वित्त विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश
हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों को मिलने वाले विभागीय ऋण व अग्रिम राशि के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए स्वीकृति आदेश में 24 प्रकार की जानकारियां दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है।
हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले विभागीय ऋण और अग्रिम राशि (Advance) की प्रक्रिया में वित्तीय पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से राज्य के वित्त विभाग ने एक नई और बेहद सख्त व्यवस्था लागू की है। अब कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का लोन या एडवांस स्वीकृत कराने के लिए निर्धारित 24 प्रकार की जानकारियां प्रशासनिक स्वीकृति आदेश में दर्ज कराना अनिवार्य होगा। वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाने और प्रधान महालेखाकार कार्यालय में रिकॉर्ड को सुव्यवस्थित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित विवरण के बिना राशि जारी की गई, तो संबंधित स्वीकृति अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
📝 कर्मचारी का व्यक्तिगत विवरण और सेवा संबंधी जानकारी देना अनिवार्य: इन श्रेणियों पर लागू होंगे नियम
जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, लोन स्वीकृति आदेश में कर्मचारी का नाम, पिता या पति का नाम, पदनाम, पे-लेवल, यूनिक कोड, जीपीएफ (GPF) या यूएएन (UAN) नंबर, स्थायी पता, मोबाइल नंबर, नियुक्ति व सेवानिवृत्ति की तिथि और मूल वेतन (Basic Pay) दर्ज करना होगा। इसके अतिरिक्त, विभागों को यह भी साफ करना होगा कि अग्रिम राशि किस श्रेणी (जैसे— हाउस बिल्डिंग एडवांस HBA, वाहन, कंप्यूटर, साइकिल या विवाह अग्रिम) के अंतर्गत दी जा रही है। यदि राशि किस्तों में स्वीकृत हो रही है, तो पूर्व में जारी किस्तों की संख्या और वर्तमान किस्त का ब्योरा भी आदेश में स्पष्ट रूप से देना होगा।
💰 ब्याज दर, मूलधन और मासिक किस्त का पूरा हिसाब: अधिकारियों की तय होगी सीधी जवाबदेही
वित्त विभाग के आदेश के तहत अब कुल स्वीकृत राशि, लागू ब्याज दर, मूलधन व ब्याज की वसूली की समयावधि और प्रतिमाह काटी जाने वाली किस्त की राशि का पूरा हिसाब एक ही आदेश में दर्ज करना होगा। इसके साथ ही बजट हेड और ट्रेजरी का विवरण भी शामिल रहेगा। विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिला एवं सत्र न्यायाधीशों व एसडीएम स्तर के अधिकारियों को इन नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कदम से न केवल वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि रिकॉर्ड प्रबंधन से जुड़ी तमाम प्रशासनिक कमियों को भी दूर किया जा सकेगा।