साकेत कोर्ट का फैसला: पत्नी की हत्या करने वाले पति को उम्रकैद की सजा
साकेत कोर्ट ने पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई। जज ने 6 साल की बच्ची की त्रासदी पर भावुक टिप्पणी की। पूरी खबर पढ़ें।
दिल्ली की साकेत जिला अदालत ने वर्ष 2022 में चरित्र के संदेह में पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में दोषी पति सुभाष बेरा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल की अदालत ने सजा सुनाते हुए भावुक टिप्पणी की।
अदालत ने कहा कि कोर्टरूम में सबसे प्रभावशाली दलील किसी भी पक्ष के शब्दों या तर्कों से नहीं, बल्कि उस छह साल की मासूम बच्ची की खामोशी ने दी है, जो यह जानते हुए खड़ी है कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं रही और पिता कानून के आदेश से उम्रभर के लिए जेल जा चुका है। किसी बच्चे के लिए इससे बड़ी त्रासदी और क्या हो सकती है कि वह नाम के अलावा हर मायने में पूरी तरह से अनाथ हो जाए। कोर्ट ने मासूम के पुनर्वास और मुआवजे के लिए दक्षिण-पूर्वी दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण को तत्काल जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए।
साल 2022 का है मामला
मामला नवंबर 2022 में ग्रेटर कैलाश थानाक्षेत्र का है। रोजगार के लिए सुभाष अपनी पत्नी पल्लवी बेरा और दो साल की बेटी के साथ दिल्ली आया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि सुभाष अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था। वारदात से ठीक एक दिन पहले उसने पत्नी को जान से मारने की धमकी दी थी।
कमरे में ताला लगाकर भाग निकला था
वारदात की रात भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। 13 नवंबर की देर रात सुभाष ने ग्रेटर कैलाश-1 स्थित जमरूदपुर के मकान में पल्लवी की गला घोंटकर हत्या कर दी। तड़के सुबह वह अपनी दो साल की बच्ची को गोद में लेकर, कमरे का ताला लगाकर भाग निकला। फिर ग्रेटर कैलाश थाने पहुंचकर पुलिस के सामने कबूल किया कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है और उसकी लाश घर पर पड़ी है। मेडिकल रिपोर्ट से भी स्पष्ट हुआ था कि पल्लवी की मौत दम घुटने के कारण ही हुई थी।
कबूलनामे से मुकर गया था आरोपी
अभियोजन पक्ष ने अदालत से आरोपी को सख्त सजा देने की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष के वकीलों ने मुवक्किल को बेकसूर साबित करने की कोशिश की। अदालत में आरोपी अपने शुरुआती कबूलनामे से भी मुकर गया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि सुभाष घटना वाली रात घर पर मौजूद ही नहीं था और जब वह लौटा तो उसकी पत्नी मृत पड़ी थी। उन्होंने दावा किया कि पल्लवी की हत्या में किसी तीसरे अज्ञात व्यक्ति का हाथ हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्य इतने मजबूत हैं कि आरोपी के बचने का कोई रास्ता नहीं है।
जज ने सुनाई उमक्रैद की सजा
भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जब बंद कमरे में पत्नी की जान चली जाए, तो यह पति की जिम्मेदारी है कि वह स्पष्ट करे कि वहां क्या हुआ था, लेकिन आरोपी पूरी तरह खामोश रहा। अदालत ने कहा कि हत्या के बाद डॉक्टर को बुलाने के बजाय कमरे को बाहर से बंद करना और फरार होना उसके अपराधी आचरण को दर्शाता है। सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सुभाष को आईपीसी की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई।