साढ़े तीन करोड़ के टेंडर में भ्रष्टाचार, चैट और वॉयस कॉल रिकॉर्डिंग से खुला कमीशनखोरी का खेल
कन्नौज में साढ़े तीन करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी पर मंत्री असीम अरुण का कड़ा ऐक्शन। सिडको एक्सईएन निलंबित, घूसखोर जेई बर्खास्त और एफआईआर के निर्देश।
विकास योजनाओं और सरकारी कार्यों में भ्रष्टाचार तथा अनियमियता बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ योगी सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सख्त रुख अपनाया है। कन्नौज जिले में साढ़े तीन करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन में भारी धांधली और साठगांठ की शिकायत पर मंत्री के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई की गई है। सरकार ने यूपी सिडको के अधिशासी अभियंता (XEN) संजय गंगवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि रिश्वत मांगने के दोषी पाए गए आउटसोर्सिंग पर तैनात अवर अभियंता (JE) कमल बाबू को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।
📜 साढ़े तीन करोड़ के टेंडर में एक ही ठेकेदार पर मेहरबानी: यूपी सिडको एमडी की जांच में खुली साठगांठ की पोल
मामला एकीकृत विकास योजना के तहत स्वीकृत साढ़े तीन करोड़ रुपये के टेंडर से जुड़ा हुआ है। आरोप था कि टेंडर प्रक्रिया की शर्तें इस प्रकार बनाई गईं जिससे केवल एक ही पसंदीदा ठेकेदार को बार-बार काम आवंटित किया जाए और अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों को बिडिंग प्रक्रिया से बाहर रखा जाए। ठेकेदारों की शिकायत पर यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक (MD) संजीव कुमार द्वारा कराई गई जांच में अधिकारियों और ठेकेदार के बीच की गहरी साठगांठ उजागर हुई। नियमों को ताक पर रखकर स्वीकृत बजट और टेंडर राशि में नाममात्र का अंतर रखकर धांधली की जा रही थी।
📱 चैट और वॉयस कॉल रिकॉर्डिंग से खुला रिश्वतखोरी का खेल: एसपी को एफआईआर दर्ज करने और फोरेंसिक जांच के आदेश
जाँच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि टेंडर के एवज में चैट और वॉयस कॉल्स के माध्यम से खुलेआम कमीशन और घूस मांगी जा रही थी। ठेकेदारों के पास इसके पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद हैं। मंत्री असीम अरुण ने बताया कि पूरे मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पुलिस अधीक्षक को इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात और सिंडिकेट राज किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।