सोनभद्र में पॉक्सो केस में रिश्वत लेकर फाइनल रिपोर्ट लगाने वाला दरोगा निलंबित, सीएम योगी से शिकायत के बाद एक्शन
सोनभद्र के अनपरा थाने में तैनात दरोगा अशोक सिंह को पॉक्सो केस में 35 हजार की रिश्वत लेकर फाइनल रिपोर्ट लगाने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। सीएम योगी से शिकायत के बाद कार्रवाई हुई।
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के एक संवेदनशील मामले की जांच कर रहे दरोगा पर आरोपी से रिश्वत लेकर केस में फाइनल रिपोर्ट (FR) लगाने का संगीन आरोप लगा है। पीड़ित पक्ष द्वारा इस भ्रष्टाचार के संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजे जाने के बाद मामला गरमा गया। शासन और उच्चाधिकारियों के कड़े रुख को देखते हुए आरोपी दरोगा अशोक सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। सीओ पिपरी हर्ष पांडेय ने दरोगा के खिलाफ हुई इस निलंबन की कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि की है।
👮♂️ अनपरा थाने में तैनात थे एसआई अशोक सिंह; 25 हजार रुपये घूस लेकर लगाई थी फाइनल रिपोर्ट
मामले का पूरा पृष्ठभूमि विवरण:
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जांच अधिकारी की भूमिका: पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सोनभद्र के अनपरा थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर (SI) अशोक सिंह को पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एक केस की विवेचना सौंपी गई थी।
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रिश्वतखोरी का आरोप: आरोप है कि दरोगा अशोक सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले को रफा-दफा करने के लिए रिश्वत की मोटी रकम ली और केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
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सीएम योगी से शिकायत: जब इस घूसखोरी की भनक पीड़ित पक्ष को लगी, तो उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूरे साक्ष्यों के साथ पत्र भेज दिया। शिकायती पत्र की प्रतिलिपि सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक (SP) और जिलाधिकारी (DM) को भी प्रेषित की गई थी, जिसके बाद विभागीय जांच बैठाकर कार्रवाई की गई।
📞 25 हजार की मांग के बाद वसूले 35 हजार; दरोगा के ड्राइवर की कॉल रिकॉर्डिंग भी आई सामने
पीड़ित पक्ष के खुलासे और कॉल रिकॉर्डिंग साक्ष्य:
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झूठा मुकदमा और सांठगांठ: पीड़ित पक्ष के अनुसार, गांव की ही एक महिला ने गत 11 सितंबर को उसकी 11 वर्षीय ननद के साथ छेड़खानी का आरोप लगाते हुए पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज कराया था। इस झूठे केस से बचाने और फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर दरोगा अशोक सिंह ने पहले 25 हजार रुपये की मांग की।
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अतिरिक्त वसूली: पीड़ित ने जब 25 हजार रुपये दे दिए, तो दरोगा के चालक ने फोन कर कहा कि इतना ही पैसा थानाध्यक्ष (SO) को भी देना पड़ेगा, जिसके बाद दबाव बनाकर 10 हजार रुपये और वसूल लिए गए।
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कॉल रिकॉर्डिंग मौजूद: पीड़ित का दावा है कि दरोगा के ड्राइवर के साथ हुई इस पूरी बातचीत की ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग उसके पास सुरक्षित है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि रिश्वत लेने के बाद भी दरोगा द्वारा लगातार उसे और उसके परिजनों को डराया-धमकाया जा रहा था।