‘स्वाइन फ्लू’ से न घबराएं, सामान्य मौसमी फ्लू का ही हिस्सा है H1N1 – डॉ. सुमिता मिश्रा

राज्य में इन्फ्लुएंजा नियंत्रण में है। एसीएस डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्वाइन फ्लू से न घबराने, लक्षण पहचानने और बिना डॉक्टरी सलाह एंटीबायोटिक न लेने की अपील की।

चंडीगढ़: हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य में मौसमी इन्फ्लुएंजा (फ्लू) की स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे इससे न घबराएं। स्वास्थ्य विभाग पूरे प्रदेश में कड़ी निगरानी रख रहा है और सभी सरकारी व निजी अस्पतालों को त्वरित जांच व इलाज के लिए अलर्ट रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।

🦠 स्वाइन फ्लू (H1N1) से घबराने की जरूरत नहीं: सामान्य मौसमी फ्लू का ही है हिस्सा

वायरस की सच्चाई और भ्रांतियां:

  • स्वाइन फ्लू का भ्रम दूर करें: डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि H1N1 अब मौसमी इन्फ्लुएंजा का ही एक रूप है, जिसे नियमित स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली के तहत ट्रैक किया जाता है।

  • 2009 के बाद बदला रूप: वर्ष 2009 में इसके मूल स्रोत के कारण इसे ‘स्वाइन फ्लू’ कहा गया था, लेकिन अब यह आम इंसानी वायरल इन्फेक्शन की तरह ही है। इसलिए केवल नाम से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।

🤒 स्वाइन फ्लू एवं इन्फ्लुएंजा के प्रमुख लक्षण

पहचानें संक्रमण के संकेत:

“इन्फ्लुएंजा सांस से जुड़ा संक्रमण है। इसमें तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिर व शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं। बच्चों में कुछ मामलों में उल्टी और दस्त जैसी पेट की समस्याएं भी देखी जा सकती हैं।”

👵 बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष एडवाइजरी: हाई-रिस्क ग्रुप रखें ध्यान

किन्हें बरतनी है अधिक सतर्कता:

  • संवेदनशील समूह: 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, 5 वर्ष से छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और डायबिटीज, बीपी या दिल की बीमारी से पीड़ित मरीज विशेष सावधान रहें।

  • डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें: यदि सांस लेने में तकलीफ हो, छाती में दर्द हो या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर से संपर्क करें।

🛡️ इन्फ्लुएंजा से रोकथाम के उपाय: बिना सलाह न लें एंटीबायोटिक दवाएं

बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां:

  • मास्क व स्वच्छता: भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क लगाएं। साबुन व पानी या सैनिटाइजर से बार-बार हाथ धोएं। खांसते या छींकते वक्त मुंह ढकें।

  • एंटीबायोटिक से बचें: वायरल इन्फेक्शन में बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से एंटीबायोटिक दवाएं बिल्कुल न लें।

  • पर्याप्त तरल पदार्थ: खूब पानी और तरल पदार्थ पिएं तथा पौष्टिक आहार लें। बीमार महसूस होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखें।

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