हिसार में पारा 38.7 डिग्री तक पहुंचा, मौसम विभाग ने किसानों और पशुपालकों के लिए जारी की एडवाइजरी
हरियाणा में मानसून की गतिविधियां कमजोर होने से गर्मी और उमस बढ़ गई है। मौसम विभाग ने 1 सितंबर से बदलाव की संभावना जताई है।
चंडीगढ़: हरियाणा में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने से गर्मी और उमस का असर बढ़ गया है. मानसून ट्रफ के हिमालय की तलहटियों की ओर खिसकने से प्रदेश में बारिश काफी कम हो गई है. मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार, शनिवार को केवल तीन उत्तरी जिलों में बारिश की संभावना है.
तीन जिलों में बारिश के आसार: पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. वहीं कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत, कैथल, जींद, हिसार, रोहतक, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी, चरखी दादरी, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, पलवल और नूंह में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है.
सामान्य से 2.4 डिग्री ज्यादा तापमान: बारिश की कमी का असर तापमान पर साफ दिखाई दे रहा है. प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 2.4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया. हिसार में पारा 38.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक रहा. यहां तापमान सामान्य से करीब 3 डिग्री अधिक रिकॉर्ड हुआ.
भिवानी और नूंह में भी गर्मी: हिसार के बाद भिवानी में 37.5 डिग्री, नूंह में 37 डिग्री, नारनौल में 36.5 डिग्री और रोहतक में 35.9 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया. मौसम में बारिश की कमी के कारण दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.
रात में यमुनानगर सबसे ठंडा: रात के तापमान में पिछले 24 घंटे में औसतन 0.3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई. यमुनानगर में न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो प्रदेश में सबसे कम था. अंबाला में 26.4, करनाल में 25.8, हिसार में 26.6, नारनौल में 27, सिरसा में 27.6 और रोहतक में 28.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा.
1 सितंबर से बदल सकता है मौसम: मौसम विभाग की मानें तो 31 अगस्त तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने की संभावना है. मौसम मुख्य रूप से परिवर्तनशील रहेगा. इसके बाद 1 से 3 सितंबर के बीच मानसूनी हवाओं में बदलाव हो सकता है, जिससे प्रदेश के कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश की संभावना बन रही है.
किसानों को सिंचाई और छिड़काव रोकने की सलाह: मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए किसानों को अगले तीन-चार दिनों तक फसलों में सिंचाई और कृषि रसायनों के छिड़काव को स्थगित रखने की सलाह दी गई है. किसानों को मौसम की स्थिति देखकर ही कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है. उच्च आर्द्रता के कारण फसलों में रस चूसक कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है. सफेद मक्खी, जेसिड और गुलाबी सुंडी के साथ धान में रूट वीविल का खतरा भी बताया गया है. किसानों को नियमित रूप से फसलों की निगरानी करने की सलाह दी गई है.
पशुओं को उमस से बचाएं: अत्यधिक उमस के दौरान पशुओं और पोल्ट्री फार्म में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना जरूरी है. पंखे और एग्जॉस्ट की उचित व्यवस्था रखने, पशुओं को साफ पानी और हरा चारा देने की सलाह दी गई है. खुराक में 50 ग्राम आयोडीन युक्त नमक मिलाने की भी सलाह दी गई है.