11 साल की उम्र में थामी थी हॉकी स्टिक, अब देश का नाम रोशन कर रही हैं साक्षी राणा
एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता है। सोनीपत की साक्षी राणा ने शानदार प्रदर्शन कर देश और परिवार का नाम रोशन किया है।
एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया है, जिसमें हरियाणा के सोनीपत की चार बेटियों ने अहम भूमिका निभाई है। इनमें से एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी साक्षी राणा भी हैं, जिन्होंने टूर्नामेंट के लिए रवाना होने से पहले ही अपने परिवार से देश के लिए सोना जीतकर लौटने का वादा किया था। मैदान पर अपना शत-प्रतिशत देते हुए साक्षी ने आखिरकार वह कर दिखाया और उनके गोल्ड मेडल जीतते ही पूरे परिवार व क्षेत्र में जश्न का माहौल बन गया।
🎯 11 साल की उम्र में शुरू किया था सफर: जूनियर विश्व कप से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का कड़ा संघर्ष
साक्षी राणा ने महज 11 साल की छोटी उम्र में ही हॉकी स्टिक थाम ली थी और खेल के प्रति उनका जुनून लगातार बढ़ता गया। अपनी कड़ी मेहनत और बेहतरीन प्रदर्शन के बल पर उन्होंने जूनियर विश्व कप और जूनियर एशिया कप जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके सपनों को पंख देने के लिए परिवार ने गांव छोड़कर सोनीपत में बसने का फैसला किया ताकि उन्हें बेहतर खेल सुविधाएं मिल सकें। खास बात यह है कि उनके परिवार में खेल का माहौल है और उनके भाई रोहित भी एक हॉकी खिलाड़ी हैं।
🌟 परिवार का साथ और कोच प्रीतम सिवाच का मार्गदर्शन: बेटियों को आगे बढ़ाने का दे रहा है संदेश
साक्षी की इस शानदार सफलता में उनके परिवार के अटूट भरोसे के साथ-साथ भारतीय हॉकी की दिग्गज कोच प्रीतम सिवाच की अहम भूमिका रही है। साक्षी की चाची का कहना है कि हर परिवार को अपनी बेटियों पर भरोसा करना चाहिए और उन्हें खेलों में आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। आज उसी लगन, परिवार के समर्थन और कोच की मेहनत का नतीजा है कि साक्षी के गले में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक है और उन्होंने अपना हर वादा शान से पूरा किया है।