12 सालों में रोजगार घटा, बढ़ा नहीं; लोकसभा में दीपेंद्र हुड्डा के सवाल पर केंद्र का जवाब

लोकसभा में कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा के सवाल पर सरकार का जवाब। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में रोजगार स्थिर, 10 लाख पद खाली।

चंडीगढ़: रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने लोकसभा में बेरोजगारी को लेकर सवाल पूछा. जिसमें चौंकाने वाला जवाब मिला है. सांसद के मुताबिक सरकार ने माना कि पिछले 12 वर्षों में देश में रोज़गार घटा है. बढ़ा नहीं. पिछले एक दशक से सरकार भारत में “जॉबलेस ग्रोथ” यानी बेरोजगारी बढ़ाने वाले विकास के रास्ते पर चल रही है. सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने बताया कि “सरकार बता ही नहीं पाई कि रोजगार सृजन पर्याप्त है या नहीं. स्पष्ट रूप से पूछे गए सवाल को ही टाल गई.”

दीपेंद्र के रोजगार के सवाल का दीपेंद्र ने दिया जवाब: दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों ने देश में बेरोजगारों की फ़ौज खड़ी कर दी है. सांसद दीपेंद्र हुड्डा के सवाल का केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने जो जवाब दिया. उसके मुताबिक “कुल कार्यबल में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 2017-18 में 12.1% थी और 2025 में भी 12.1% ही है यानी आठ साल में शून्य विकास हुआ. हैरानी की बात तो ये है कि वर्ष 2020-21 में ये घटकर 10.9% तक पहुंच गया था. सेवा क्षेत्र में भी यही हाल है. 2017-18 में हिस्सेदारी 31.1% थी, 2025 में भी 31.8%. यानी लगभग स्थिर बनी हुई है.”

UNEMPLOYMENT FIGURES IN THE COUNTRY
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केंद्र सरकार के विभागों में करीब 10 लाख पद खाली: कांग्रेस सांसद ने कहा कि “2014 में भाजपा ने नारा दिया था कि हर साल 2 करोड़ रोजगार पैदा करेंगे. 12 साल के 24 करोड़ रोजगार मिलने चाहिए थे. देश में करीब इतने ही घर हैं, लेकिन हकीकत ये है कि नये रोजगार मिलना तो दूर की बात है. रोजगार के बहुत सारे महकमों में रोजगार के रास्ते बंद कर दिये. अकेले केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में करीब 10 लाख पद खाली पड़े हैं.

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‘देश का युवा बेरोजगार हो चुका है’: सांसद ने कहा कि “बीजेपी सरकार ने फौज की रेगुलर भर्ती बंद करके अग्निपथ योजना लागू कर दी और युवाओं के लिए पक्के रोजगार के इस रास्ते को भी बंद कर दिया. अग्निवीर योजना के तहत भर्ती हुए योवाओं के ये नहीं मालूम कि वो बेरोजगार है या बारोज़गार हैं. पिछले एक दशक से “मेक इन इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया”, “आत्मनिर्भर भारत” जैसे भारी भरकम नारे लगाए जा रहे हैं, लेकिन ये सब जमीन पर जुमला साबित हो रहे हैं. जॉबलेस ग्रोथ वाले इस मॉडल की कीमत देश का हर बेरोजगार युवा चुका रहा है.

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सरकार ने सीधा जवाब नहीं दिया- दीपेंद्र: सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने सरकार से ये भी सवाल किया था कि क्या सरकार रोजगार सृजन के स्तर को पर्याप्त मानती है? यदि नहीं, तो अपर्याप्त रोजगार सृजन के क्या कारण हैं? सांसद के मुताबिक “सरकार ने इस सीधे सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं दिया. उलटे योजनाओं की एक लंबी सूची थमा दी, लेकिन ये नहीं बताया कि इन योजनाओं से कितना वास्तविक रोजगार सृजन हुआ.”

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