2014 में संभाली थी हरियाणा की कमान, अब केंद्र में संभाल रहे देश की ऊर्जा और शहरी विकास की बागडोर
26 अक्टूबर 2014 को हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने से लेकर केंद्रीय मंत्री तक, जानें मनोहर लाल के 12 वर्षों के प्रशासनिक सुधार, सादगी और सुशासन का पूरा सफर।
हरियाणा की राजनीति में 26 अक्टूबर 2014 का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ, जब प्रदेश में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी और मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। संगठनात्मक अनुभव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लंबे समय तक काम करने के भरोसे के चलते उन्हें प्रदेश की बागडोर सौंपी गई। अनेक प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद मनोहर लाल ने हरियाणा में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार, बिचौलियों की भूमिका को खत्म करने और योग्यता आधारित भर्ती जैसी व्यवस्था लागू करके सुशासन की एक नई नींव रखी। जून 2024 में करनाल लोकसभा सीट से जीत हासिल करने के बाद वे केंद्र सरकार में केंद्रीय ऊर्जा तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री बने।
📜 ‘बिना पर्ची, बिना खर्ची’ भर्ती और सादगी की मिसाल: वेतन व पुश्तैनी संपत्ति दान कर कार्यकर्ताओं में कहलाए ‘सियासत के संत’
मनोहर लाल के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि राज्य में वर्षों से चली आ रही ‘पर्ची-खर्ची’ (सिफारिश और रिश्वत) भर्ती प्रथा को समाप्त कर पूरी तरह से मेरिट व पारदर्शिता के आधार पर नौकरियां देना रहा, जिसकी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहना की। इसके अलावा, मुख्यमंत्री पद पर रहने के बावजूद उन्होंने सादगी और जनसेवा के अपने सिद्धांतों को सर्वोपरि रखा। उन्होंने अपना पुश्तैनी मकान पुस्तकालय के लिए दान कर दिया, अपनी कृषि भूमि की बिक्री की राशि और मुख्यमंत्री के रूप में मिलने वाला पूरा वेतन प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करवा दिया। इसी त्याग और ईमानदारी के कारण पार्टी कार्यकर्ता उन्हें ‘सियासत का संत’ भी कहते हैं। वर्तमान में केंद्रीय मंत्री के रूप में वे देश भर के राज्यों का दौरा कर ऊर्जा और शहरी बुनियादी ढांचे के विस्तार को गति दे रहे हैं।