661 करोड़ के बैंक घोटाले के बाद हरियाणा सरकार का सख्त कदम, अब हर 3 महीने में होगा सरकारी खातों का सत्यापन
661 करोड़ के बैंक घोटाले के बाद हरियाणा वित्त विभाग ने सख्त नियम लागू किए। सरकारी संस्थाओं को हर 3 महीने में बैंक खातों का सत्यापन कराना अनिवार्य।
चंडीगढ़ : हरियाणा में आइडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्माल बैंक से जुड़े 661 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले की सीबीआई जांच के बीच प्रदेश सरकार ने सरकारी धन की निगरानी और कड़ी कर दी है। वित्त विभाग ने सरकारी कंपनियों, बोर्ड-निगमों, सहकारी संस्थाओं और स्वायत्त निकायों में जमा सरकारी फंड की नियमित जांच अनिवार्य कर दी है। अब इन संस्थाओं को बैंकों में जमा सरकारी धनराशि का हर तीन महीने में सत्यापन और खातों के रिकॉर्ड से मिलान कराना होगा।
इस व्यवस्था के तहत बचत खाते, चालू खाते, टर्म डिपॉजिट और फ्लेक्सी खातों की भी समीक्षा की जाएगी। वित्त विभाग ने सभी संबंधित संस्थाओं के प्रबंध निदेशकों (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को तिमाही प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं।
एमडी-सीईओ को देना होगा तिमाही प्रमाणपत्र
वित्त विभाग ने इसके लिए बाकायदा एक निर्धारित प्रोफार्मा जारी किया है। संबंधित संस्था के एमडी या सीईओ को इस प्रोफार्मा में बैंक खातों में जमा धनराशि का सत्यापन और लेखा रिकॉर्ड से उसका मिलान किए जाने की पुष्टि करनी होगी।
प्रमाणपत्र पर एमडी या सीईओ के हस्ताक्षर के साथ नाम, पदनाम, तारीख और संस्था की आधिकारिक मुहर लगानी होगी। इसके बाद यह प्रमाणपत्र प्रत्येक तिमाही वित्त विभाग द्वारा नामित संस्था के निदेशक को भेजना होगा।
बैंक खातों और लेखा पुस्तकों का होगा मिलान
प्रमाणपत्र में यह पुष्टि करनी होगी कि संस्था के विभिन्न बैंक खातों में जमा धनराशि का संबंधित तिमाही के बैंक स्टेटमेंट और खातों की प्रतियों से सत्यापन किया गया है। बैंक रिकॉर्ड और संस्था के लेखा रिकॉर्ड में दर्ज राशि का मिलान भी जरूरी होगा। एमडी और सीईओ को यह भी घोषित करना होगा कि प्रमाणन की तारीख तक संबंधित बैंक खातों में किसी तरह की विसंगति नहीं मिली है। साथ ही यह प्रमाणित करना होगा कि सभी बैंक खाते वित्त विभाग की ओर से जारी नियमों, निर्देशों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप खोले और संचालित किए जा रहे हैं।
बैंकों से मिलने वाले ब्याज पर भी नजर
सरकार ने केवल मूल जमा राशि के सत्यापन तक व्यवस्था सीमित नहीं रखी है। बैंक खातों और एफडीआर पर मिलने वाले ब्याज की भी नियमित निगरानी की जाएगी। संस्थाओं को यह प्रमाणित करना होगा कि बैंक द्वारा निवेश के समय खाते या एफडीआर पर देय ब्याज सही खाते में जमा किया गया है और उसका भी सत्यापन किया गया है। इससे ब्याज की राशि के गलत खाते में जाने या लेखा रिकॉर्ड में दर्ज न होने जैसी संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाने की कोशिश होगी।
बीआरएस का बैंक रिकॉर्ड से होगा मिलान
संस्थाओं को बैंक रिकंसिलिएशन स्टेटमेंट (बीआरएस) तैयार करना भी अनिवार्य होगा। बीआरएस में दर्शाए गए बैलेंस का संस्था की लेखा पुस्तकों, बैलेंस शीट और संबंधित बैंक के रिकॉर्ड में उपलब्ध बैलेंस से मिलान किया जाएगा। इस प्रक्रिया से बैंक खातों और संस्था के वित्तीय रिकॉर्ड के बीच किसी भी अंतर का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।
तीन स्तर के ऑडिट की स्थिति भी बतानी होगी
तिमाही प्रमाणपत्र में संस्था को अपने अंतिम स्टैच्यूटरी ऑडिट, एजी ऑडिट और इंटरनल ऑडिट की स्थिति का भी उल्लेख करना होगा। एमडी और सीईओ को प्रमाणपत्र में यह दर्ज करना होगा कि संबंधित ऑडिट संतोषजनक पाए गए हैं और इनमें किसी तरह की वित्तीय विसंगति अथवा अनियमितता इंगित नहीं की गई है। यदि किसी ऑडिट में कोई आपत्ति या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो उसकी स्थिति भी रिकॉर्ड में स्पष्ट रखनी होगी।
सरकारी धन की सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
बैंक खातों के तिमाही सत्यापन की नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी संस्थाओं में जमा धनराशि की निगरानी मजबूत करना और वित्तीय अनियमितताओं की संभावनाओं को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है। खासकर हाल में सामने आए बड़े बैंकिंग घोटाले के बाद सरकारी फंड के संचालन, बैंक खातों और लेखा रिकॉर्ड के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर बढ़ा है।
- हर तीन महीने में देनी होगी वित्तीय स्थिति की पुष्टि
- सभी सरकारी बैंक खातों की तिमाही जांच होगी।
- बचत, चालू, टर्म डिपॉजिट और फ्लेक्सी खातों की समीक्षा होगी।
- बैंक स्टेटमेंट और लेखा पुस्तकों का मिलान अनिवार्य होगा।
- ब्याज की जमा राशि का भी सत्यापन किया जाएगा।
- बीआरएस को बैंक और संस्था के रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा।
- एमडी/सीईओ को हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र वित्त विभाग के नामित अधिकारी को देना होगा।