जेलों में भीड़ और स्टाफ की कमी पर हाई कोर्ट सख्त; पंजाब-हरियाणा को फटकार

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने जेलों की बदहाली पर जताई चिंता। राज्यों की पुरानी स्टेटस रिपोर्ट को नकारा। ओवरक्राउडिंग और भर्ती प्रक्रिया पर विस्तृत चार्ट मांगा।

चंडीगढ़ : जेलों में बढ़ती भीड़, स्टाफ की भारी कमी और कैदियों के साथ उनके बच्चों की स्थिति को लेकर दायर याचिकाओं पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान गंभीर – तस्वीर सामने आई जिस पर अदालत ने स्पष्ट कहा कि राज्यों द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट अधूरी और पुरानी है, जिससे वास्तविक स्थिति का आकलन करना मुश्किल हो रहा है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत सभी राज्यों को जेलों की स्थिति सुधारने के लिए गाइडलाइन जारी की जा चुकी है और अब राज्यों की जिम्मेदारी है कि वे उनका पालन करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करें। हाई कोर्ट के – समक्ष यह तथ्य रखा गया कि पंजाब सरकार ने 19 मई 2025 को अपनीस्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है, जबकि यूटी प्रशासन ने फरवरी और अप्रैल 2025 में रिपोर्ट दी।

कोर्ट ने यह भी पाया कि राज्यों की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे जेलों में ओवरक्राउंडिंग, विस्तार योजनाएं, भर्ती प्रक्रिया और उपलब्ध संसाधनों पर स्पष्ट जवाव नहीं दिया गया है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने अमीकस क्यूरी को निर्देश दिया कि वे तीनों पंजाव, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ द्वारा दाखिल हलफनामे में मौजूद कमियों का एक विस्तृत चार्ट तैयार करें।

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