चिराग त्यागी हत्याकांड: आरोपी के पास मिले 2 फर्जी आईडी, खुला बड़ा राज
पैरा एथलीट चिराग त्यागी हत्याकांड में नया खुलासा। मुख्य आरोपी यश खटीक के पास मिले दो फर्जी पहचान पत्र। ओलंपिक संघ ने भी नहीं मानी दिव्यांगता।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के पैरा एथलीट चिराग त्यागी के हत्याकांड मामले में आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. पुलिस की जांच में हत्याकांड के मुख्य आरोपी यश खटीक के फर्जीवाड़े की परतें खुल भी रही हैं. पुलिस को आरोपी यश के पास से दो आधार कार्ड मिले हैं. बताया जा रहा है कि पैरा एथलीट बनने के लिए यश ने अपनी जन्मतिथि बदली थी. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है मामला परत-दर-परत खुलता जा रहा है.
पुलिस जांच में यश के दो आधार कार्ड मिले हैं. दोनों में उसकी जन्मतिथि अलग-अलग है. आशंका है कि पैरा एथलीट बनने के लिए उसने यह फर्जीवाड़ा किया. यह भी पता चला है कि जनवरी 2026 में ओलंपिक संघ की ओर से कराई गई जांच में उसमें किसी प्रकार की दिव्यांगता की पुष्टि नहीं हुई थी. पुलिस जांच में सामने आया है कि यश खटीक शारीरिक रूप से स्वस्थ है. इसी के चलते उसका चयन पैरा एथलीट प्रतियोगिताओं के लिए नहीं हो सका था.
2 आधार कार्ड जब्त
आरोप है कि वह आंखों की दिव्यांगता बताकर ही पैरा एथलीट बनने की कोशिश कर रहा था. यश के पास से मिले दो आधार कार्ड में सेएक में उसकी जन्मतिथि पांच नवंबर 2008 और दूसरे में छह जुलाई 2005 दर्ज है. पुलिस ने दोनों दस्तावेज कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. यह भी सामने आया है कि चिराग त्यागी की चेक बुक, यूपीआई कोड और पासवर्ड की जानकारी यश को थी. चिराग की हत्या के बाद भी आरोपी ने उसके खाते से तीन लाख रुपये निकाले थे.
दो आरोपियों को नहीं तलाश पाई पुलिस
आरोपी ने पूछताछ में रकम अपने चाचा और एक दोस्त को देने की बात कही है. घटना के 14 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस इन दोनों आरोपियों को पकड़ नहीं पाई है. बता दें कि 14 जून को बसंतपुर सैंथली स्थित जेवीएस फार्म में महापंचायत होगी. इसमें चिराग के माता-पिता को न्याय दिलाने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, आजीविका के लिए दुकान आवंटित करने, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और चिराग की स्मृति में स्टेडियम निर्माण जैसी मांगें उठाई जाएंगी.
न्याय के लिए महापंचायत का आयोजन
परिजनों का आरोप है कि घटना को दो सप्ताह बीतने के बाद भी न तो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और न ही प्रशासन ने उनकी सुध ली है. मांगें पूरी नहीं होने पर महापंचायत में आमरण अनशन की घोषणा भी की जा सकती है. सूत्रों के मुताबिक, महापंचायत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों, खिलाड़ी संगठनों और समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं समेत राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं. ऐसे में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और लोकल इनपुट के माध्यम से जानकारी जुटा रहे हैं.