शेयर बाजार का साप्ताहिक आउटलुक: बाजार की चाल तय करेंगे ये 5 बड़े फैक्टर

शेयर बाजार में भारी गिरावट के बाद अगले हफ्ते का हाल क्या होगा? जानें वो 5 बड़े कारण जो बाजार की दिशा और आपकी निवेश रणनीति पर असर डालेंगे।

शुक्रवार, 19 जून को भारत के बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स – सेंसेक्स और निफ्टी 50 – की लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया. इसकी सबसे बड़ी वजह थी एक्सेंचर, जिसने अपने रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान को घटा दिया था. उसके बाद आईटी शेयरों में भारी गिरावट आई. बाजार की धारणा पर कमजोर ग्लोबल मार्केट ट्रेंड, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली की वापसी और जारी भू-राजनीतिक चिंताओं का भी असर पड़ा. सेंसेक्स 607 अंक या 0.78 फीसदी गिरकर 76,802.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 154.90 अंक या 0.64 फीसदी की गिरावट आई और यह 24,013.10 पर बंद हुआ.

इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान, सेंसेक्स 900 अंक से अधिक गिरकर 76,500 के स्तर से नीचे आ गया, जबकि निफ्टी 50 में 200 अंक से अधिक की गिरावट आई और यह 23,950 से नीचे फिसल गया. यह भारी बिकवाली बेंचमार्क इंडेक्स में आई जोरदार तेजी के बाद हुई, जिसमें पिछले पांच ट्रेडिंग सेशन में लगभग 5% की बढ़त हुई थी.

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर अगले हफ्ते शेयर बाजार का रुख किस करवट लेगा. ताजा अपडेट के अनुसार मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से टेंशन का माहौल पैदा हो गया है. ईरान ने होर्मुज को एक बार फिर से बंद करने का आदेश दे दिया है. वहीं दूसरी ओर विदेश निवेशकों रुख भी काफी कुछ तस करेगा. वहीं दूसरी बात सबसे अहम कच्चे तेल की कीमत भी काफी अहम रहेगी.

ये 5 फैक्टर तय करेंगे शेयर बाजार की चाल

US-Iran शांति समझौता

अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी युद्धविराम के लिए बातचीत रविवार को स्विट्जरलैंड में शुरू होने वाली थी, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सहित सीनियर अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद थी. होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के ईरान के नए निर्देश के बावजूद बातचीत जारी है.

लंबे समय से एक-दूसरे के विरोधी रहे ये देश बातचीत की मेज पर तब आ रहे हैं जब दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच अलग-अलग टकराव हुए, जिससे बातचीत में देरी हुई. बातचीत उस 60-दिन के ढांचे के तहत हो रही है जिसे डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को पेरिस यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत स्थापित किया था, हालांकि समझौते में जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाने का प्रावधान भी शामिल है.

कच्चे तेल की कीमतें

शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, लेकिन यह पूरे सप्ताह में लगभग 8% की गिरावट की ओर अग्रसर रहा, क्योंकि लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम समझौते के बाद आपूर्ति में व्यवधान की चिंताएं कम हो गईं. हालांकि, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के उपयोग से संबंधित ईरान की शर्तों के बाद बाजार का रुख सतर्क बना रहा.

ब्रेंट क्रूड वायदा (futures) 66 सेंट या 0.53% बढ़कर $80.38 प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 94 सेंट या 1.23% बढ़कर $77.54 प्रति बैरल हो गया. दिन में बढ़त के बावजूद, ब्रेंट एक सप्ताह पहले की तुलना में अभी भी लगभग 8% नीचे था, जो संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से US-Iran समझौते के बाद आपूर्ति-जोखिम प्रीमियम में भारी कमी को दर्शाता है.

FII की निकासी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने जून के पहले पखवाड़े में अपनी बिकवाली का सिलसिला जारी रखा, जिसमें वित्तीय, तेल और गैस, ऑटोमोबाइल, IT, FMCG और धातु सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारी निकासी दर्ज की गई. इस अवधि के दौरान FIIs शुद्ध विक्रेता (net sellers) बने रहे और उन्होंने भारतीय इक्विटी से 40,486 करोड़ निकाले. इससे पहले मई में 46,888 करोड़ और अप्रैल मे 49,034 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री हुई थी. कुल मिलाकर, FIIs ने 2026 में अब तक 2.74 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा के भारतीय शेयर बेचे हैं.

फाइनेंशियल सेक्टर पर बिकवाली का दबाव बना रहा. FIIs ने जून के पहले हिस्से में 11,263 करोड़ रुपए के शेयर बेचे. इससे पहले मई में 23,141 करोड़ रुपए और अप्रैल में 30,856 करोड़ रुपए की नेट आउटफ़्लो (पूंजी की निकासी) हुई थी, जिससे यह विदेशी निवेशकों द्वारा सबसे ज़्यादा बिकवाली वाला सेक्टर बन गया है.

रुपया बनाम डॉलर

शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से बाजार का मूड खराब हुआ, जिससे रुपया अपनी शुरुआती बढ़त का एक बड़ा हिस्सा गंवा बैठा, लेकिन फिर भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे की मजबूती के साथ 94.33 पर बंद हुआ. फॉरेक्स मार्केट के जानकारों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में तेजी आने की उम्मीद के चलते घरेलू मुद्रा ने दिन की शुरुआत मजबूती के साथ की. इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में, रुपया 94.30 प्रति अमेरिकी डॉलर पर खुला और सेशन के दौरान 94.20 से 94.52 के दायरे में रहा. आखिरकार यह 94.33 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 7 पैसे की बढ़त दिखाता है.

सोने की कीमतें

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 2026 में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताने के बाद सोने की कीमतों पर गिरावट का दबाव बना रहा. इस आउटलुक से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिससे निवेशकों के लिए सोने जैसी बिना ब्याज वाली एसेट्स कम आकर्षक हो गईं. फेड के सख्त रुख (हॉकिश रुख) के कारण बुलियन मार्केट में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली भी देखी गई. LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, फेड की पॉलिसी घोषणा के बाद पिछले कुछ सेशन में COMEX गोल्ड में 4375 डॉलर से 4150 तक की बड़ी गिरावट आई है, जबकि MCX गोल्ड लगभग 154000 रुपए से गिरकर 147200 रुपए पर आ गया है. डॉलर के मजबूत होने की उम्मीद और ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाओं का बाजार के मूड पर असर पड़ रहा है.

क्या कहते हैं जानकार

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, आने वाले सप्ताह में निवेशकों का ध्यान मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया से जुड़ी गतिविधियों पर केंद्रित रहने की संभावना है. पोनमुडी ने कहा कि ऐसी खबरें कि अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार नई बातचीत के लिए फिर से स्विट्जरलैंड जा रहे हैं – जबकि इससे पहले तय बातचीत रद्द कर दी गई थी – और साथ ही इज़राइल-लेबनान संघर्ष विराम लागू होने से इस क्षेत्र में व्यापक राजनयिक सफलता की उम्मीदें फिर से जाग गई हैं. नतीजतन, बाजार भू-राजनीतिक मोर्चे पर होने वाली गतिविधियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बने रहने की संभावना है, और किसी भी आगे की प्रगति से ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है.

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