बदायूं: पंचायत के 10 हजार जुर्माने से परेशान 14 साल के किशोर ने दी जान
यूपी के बदायूं में पंचायत के तुगलकी फरमान से आहत 14 साल के किशोर ने आत्महत्या की। नदी में डूबने वाले युवक के बाद पंचायत ने लगाया था 10 हजार का जुर्माना।
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से ग्रामीण न्याय प्रणाली और पंचायतों के तुगलकी फरमानों पर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद दुखद घटना सामने आई है. यहां कादरचौक थाना क्षेत्र के एक गांव में पंचायत द्वारा सुनाया गया एक मनमाना फैसला 14 साल के एक किशोर की जान पर भारी पड़ गया. आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक परिवार के नाबालिग बेटे पर पंचायत ने 10 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया था. इस जुर्माने को चुकाने के मानसिक दबाव और तनाव को न झेल पाने के कारण मासूम ने पेड़ से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. किशोर का शव खेत में पेड़ से लटकता मिलने के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया है.
यह पूरी घटना कादरचौक थाना क्षेत्र के ककोड़ा गांव की है. ग्रामीण सुल्तान जाटव का 14 वर्षीय बेटा राजीव बीती 8 जून को गांव के ही कुछ अन्य युवकों और बच्चों के साथ कासगंज के कादरगंज में गंगा स्नान करने के लिए गया था. नहाने के दौरान दुर्भाग्य से गांव का ही एक युवक गहरे पानी में चला गया और डूबने से उसकी मौत हो गई. हादसे के कई दिनों बाद युवक का शव नदी से बरामद किया गया था.
पंचायत ने सुनाया तुगलकी फरमान
युवक की मौत के बाद गांव के कुछ रसूखदार लोगों ने प्रशासनिक कानूनी प्रक्रिया को ताक पर रखकर खुद की अदालत लगा ली. गांव में बैठी इस पंचायत ने गंगा स्नान के लिए साथ गए सभी युवकों और नाबालिग बच्चों को ही इस मौत का कसूरवार ठहरा दिया. तुगलकी फरमान सुनाते हुए पंचायत ने राजीव समेत सभी बच्चों पर 10-10 हजार रुपये का डंड (आर्थिक जुर्माना) लगा दिया. इतना ही नहीं, पंचायत ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए जुर्माना राशि जमा करने के लिए 23 जून तक की आखिरी मोहलत तय कर दी थी.
गरीबी के कारण गहरे डिप्रेशन में चला गया राजीव
राजीव का परिवार बेहद गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर है. उसके पिता मजदूरी करके किसी तरह घर का खर्च चलाते हैं. राजीव की जिंदगी पहले से ही काफी संघर्षपूर्ण थी, क्योंकि 12 साल पहले ही उसकी मां का देहांत हो चुका था और उसकी तीन बड़ी बहनों ने ही मां की तरह उसे पाल-पोसकर बड़ा किया था.
परिवार को उम्मीद थी कि राजीव बड़ा होकर बुढ़ापे में पिता की लाठी बनेगा. लेकिन पंचायत के 10 हजार रुपये चुकाने के अल्टीमेटम ने उसे गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में धकेल दिया. मंगलवार दोपहर को राजीव इसी तनाव में घर से निकला और देर शाम गांव के बाहर एक खेत में नीम के पेड़ से उसका शव लटका हुआ मिला.
पुलिस जांच और ग्रामीणों में आक्रोश
इस खौफनाक वाकये के बाद ककोड़ा गांव में मातम के साथ-साथ भारी तनाव और आक्रोश का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि एक हादसे की जिम्मेदारी नाबालिग बच्चों पर डालकर उन पर पैसों का इस तरह दबाव बनाना सरासर गलत और अवैध था. सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है. पीड़ित परिवार ने इस मामले में गंगा में डूबे युवक के परिजनों और पंचायत के कर्ता-धर्ताओं के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से सघन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.