मुजफ्फरनगर: बंधक बनाकर फैक्ट्री में कराया जा रहा था काम, 12 मजदूर मुक्त

मुजफ्फरनगर में दोने बनाने की फैक्ट्री में 12 मजदूर बंधक मिले। 2 साल से हो रहा था शोषण, मोबाइल और [Aadhaar Redacted] कार्ड छीने गए। जानें क्या है पूरा मामला।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बंधुआ मजदूरी और मजदूरों के शोषण का सनसनीखेज मामला सामने आया है. तितावी थाना क्षेत्र के माड़ी गांव स्थित दोने बनाने की फैक्ट्री में पुलिस, लेबर विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 12 मजदूरों को मुक्त कराया है. आरोप है कि इन मजदूरों को पिछले करीब दो साल से बंधक बनाकर रखा गया था और उनके साथ मारपीट व अमानवीय व्यवहार किया जाता था.

पुलिस के अनुसार, फैक्ट्री में काम कराने के लिए हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों और नेपाल से गरीब मजदूरों को पैसे और नौकरी का लालच देकर लाया गया था. मजदूरों का आरोप है कि फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड छीन लिए गए. इसके बाद उन्हें बाहर जाने या किसी से संपर्क करने की इजाजत नहीं दी जाती थी.

24 घंटे में सिर्फ एक बार चोकर की रोटी

मजदूरों ने बताया कि उनसे जबरन काम कराया जाता था और मजदूरी देने की बात कहकर बुलाने वाले लोगों ने बाद में कोई भुगतान नहीं किया. आरोप है कि उन्हें 24 घंटे में सिर्फ एक बार सूखी चोकर की रोटी दी जाती थी. विरोध करने या काम में देरी होने पर लाठी-डंडों से पीटा जाता था.

मामले का खुलासा तब हुआ जब फैक्ट्री में काम करने वाला एक मजदूर किसी तरह वहां से भाग निकला और उसने पुलिस को पूरी जानकारी दी. सूचना के बाद लेबर विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में फैक्ट्री पर छापा मारा. कार्रवाई के दौरान टीम ने 12 मजदूरों को मुक्त कराया.

मुक्त कराए गए मजदूरों ने पुलिस को बताया कि फैक्ट्री में उनकी निगरानी के लिए दो पिटबुल कुत्ते भी रखे गए थे. आरोप है कि मजदूरों को डराने और भागने से रोकने के लिए इन कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता था. पुलिस ने मौके से मजदूरों की पिटाई में इस्तेमाल किए जाने वाले डंडे और अन्य सामान भी बरामद किए हैं.

मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि सूचना के आधार पर पुलिस और प्रशासन की टीम ने कार्रवाई की. उन्होंने कहा कि मुक्त कराए गए मजदूरों के शरीर पर चोटों के निशान मिले हैं और सभी का मेडिकल परीक्षण कराया गया है. मजदूरों के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

पुलिस ने इस मामले में शिवम त्यागी और प्रदीप बालियान नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों मजदूरों को अलग-अलग जगहों से फैक्ट्री तक लाने का काम करते थे. पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

मजदूर ने बताई कहानी

मुक्त कराए गए मजदूर जगदीश ने बताया कि उन्हें अंबाला से 8 हजार रुपये महीने और खाने-पीने का लालच देकर लाया गया था, लेकिन यहां आने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए. उसने आरोप लगाया कि न तो पैसे दिए गए और न ही ठीक से खाना दिया गया. उसने बताया कि मोबाइल और आधार कार्ड भी छीन लिए गए थे.

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अगर मजदूरों की मौत से जुड़े आरोपों की पुष्टि होती है तो मुकदमे में संबंधित धाराएं भी बढ़ाई जाएंगी.

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