धान की खेती: रोपाई के 40 दिनों में ऐसे करें खाद और उर्वरक प्रबंधन

धान की फसल में बेहतर पैदावार के लिए रोपाई के शुरुआती 40 दिन महत्वपूर्ण हैं। खाद की सही मात्रा, जिंक का प्रयोग और खरपतवार नियंत्रण के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह पढ़ें।

कुरुक्षेत्र: हरियाणा में इस समय धान की रोपाई का सीजन चल रहा है, लेकिन केवल रोपाई कर देना ही काफी नहीं है. रोपाई के बाद शुरुआती 40 दिन फसल के भविष्य और उसकी पैदावार को तय करते हैं. अगर इस दौरान उचित प्रबंधन ना किया जाए, तो उत्पादन पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ​कुरुक्षेत्र के क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर डॉक्टर शशि पाल शर्मा ने धान की रोपाई के बाद किए जाने वाले जरूरी कृषि कार्यों और खाद प्रबंधन को लेकर किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सलाह साझा की है.

संतुलित खाद प्रबंधन की तकनीक: डॉक्टर शशि पाल शर्मा के अनुसार “धान की फसल को सही समय पर पोषक तत्व मिलना बेहद जरूरी है. किसानों को रोपाई के 40 दिनों के भीतर खाद की पूरी खुराक खेत में डाल देनी चाहिए. इसके लिए उन्होंने तीन चरणों का शेड्यूल बताया है:​

  • चरण-1 (रोपाई के समय): रोपाई करते समय खेत में यूरिया की कुल मात्रा का तीसरा हिस्सा (1/3) डालें. इसके साथ ही एक बैग डीएपी (DAP) और 20 से 30 किलोग्राम पोटाश प्रति एकड़ की दर से मिलाएं. यदि डीएपी उपलब्ध ना हो, तो किसान भाई इसकी जगह 3 बैग एसएसपी (SSP) या 1 बैग टीएसपी (TSP) का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो डीएपी के बराबर ही काम करता है.
  • ​चरण-2 (रोपाई के 21 दिन बाद): इस समय यूरिया की दूसरी किस्त (मात्रा) खेत में डालें ताकि पौधों का फुटाव अच्छे से हो सके.
  • ​चरण- 3 (रोपाई के लगभग 35-40 दिन बाद): दूसरी खुराक के ठीक दो सप्ताह बाद यूरिया की तीसरी और अंतिम किस्त देकर खाद का काम पूरा कर लें.

हरी खाद वाले खेतों के लिए विशेष छूट: ​जिन प्रगतिशील किसानों ने धान की रोपाई से पहले अपने खेतों में हरी खाद के तौर पर मूंग या ढैंचा की फसल लगाई थी और उसे मिट्टी में जोत दिया था, उन्हें यूरिया का इस्तेमाल कम करना चाहिए. ऐसे खेतों में 25% कम यूरिया डालने की आवश्यकता होती है. इससे लागत कम होगी और भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी.​

जिंक की कमी को ना करें नजरअंदाज​: हरियाणा की मिट्टी में अक्सर जिंक की कमी देखी जाती है, जिससे धान के पौधे पीले या कत्थई रंग के होने लगते हैं और ग्रोथ रुक जाती है. जिंक की कमी को दूर करने के लिए किसान भाई प्रति एकड़ के हिसाब से​या तो 21% वाला जिंक (10 किलोग्राम) इस्तेमाल करें,​ या फिर 33% वाला चिलेटेड/मोनो जिंक (6 किलोग्राम) खेत में डालें.

  • खरपतवार और दीमक पर रखें पैनी नजर: ​रोपाई के शुरुआती दिनों में खरपतवार और कीट फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. इसके लिए ये उपाय अपनाएं.
  • ​खरपतवार नियंत्रण: रोपाई के तुरंत बाद शुरुआती 2-3 दिनों में खरपतवार उगने लगते हैं. इससे बचने के लिए अपने नजदीकी कृषि अधिकारी या विशेषज्ञ से सलाह लेकर सही खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव अवश्य करें.​
  • दीमक की समस्या: जिन इलाकों या खेतों में दीमक का प्रकोप ज्यादा होता है, वहां खड़े पानी में 2 लीटर प्रति एकड़ के हिसाब से क्लोरो (Chlorpyriphos) दवाई का इस्तेमाल करें.

पौधों के छोटे-बड़े होने की समस्या का समाधान​: अक्सर किसानों की ये शिकायत होती है कि रोपाई के बाद खेत में कुछ पौधे बड़े हो जाते हैं और कुछ छोटे रह जाते हैं, जिससे फसल एकसमान नहीं दिखती. ये समस्या अक्सर हॉपर के प्रभाव के कारण हो सकती है. इसके समाधान के लिए किसान भाई अपने स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से परामर्श लेकर तेले की रोकथाम वाली उचित दवाई का छिड़काव सही मात्रा में करें.​​

खाद का सही इस्तेमाल जरूरी: कुरुक्षेत्र के क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर डॉक्टर शशि पाल शर्मा ने कहा कि “अगर किसान भाई समय पर खादों का सही अनुपात इस्तेमाल करेंगे और कीट व खरपतवार पर नियंत्रण रखेंगे, तो ना केवल उनकी लागत में कमी आएगी बल्कि धान की गुणवत्ता और पैदावार भी शानदार होगी. कृषि विभाग किसानों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर है.”

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