पुणे मर्डर केस: 27 गुण मिलने के बाद भी टूटा रिश्ता, क्या है कुंडली का सच?

पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में 27 गुण मिलने के बाद भी मंगेतर द्वारा हत्या का दावा। कुंडली मिलान और अष्टकूट मिलान के बीच का अंतर और ज्योतिषीय सत्य समझें।

महाराष्ट्र के पुणे का बहुचर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस लगातार सुर्खियां बटोर रहा है. इस हत्याकांड को लेकर रोज कोई न कोई बड़ा खुलासा किया जा रहा है. इस बीच दावा किया गया कि केतन और उसकी मंगेतर सिया गोयल की कुंडली का मिलान इस साल जनवरी में किया गया, जिसमें 36 में से 27 गुण मिले. इस कुंडली के मिलान के बाद दोनों की शादी तय हो गई. सिया पर आरोप लगे कि उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर केतन को 18 जून को लोहागढ़ किले से धक्का मार दिया और उसकी जान ले ली. वहीं, कुंडली सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि 27 गुण मिलने के बाद सिया ने ऐसा क्यों किया?

ज्योतिष शास्त्र का यह एक बहुत ही गहरा और व्यावहारिक प्रश्न है. कई बार लोग सिर्फ गुण मिलान के अंक देखकर विवाह की अनुमति दे देते हैं और बाद में जब वैवाहिक जीवन में तालमेल नहीं बैठता, तो वे निराश हो जाते हैं. अष्टकूट मिलान और पत्री मिलान यानी कुंडली मिलान में एक बहुत बड़ा अंतर है. इसे इस तरह समझें कि अष्टकूट मिलान केवल एक प्रारंभिक जांच है, जबकि पत्री मिलान संपूर्ण और अंतिम जांच है.

अष्टकूट मिलान में केवल वर और वधू की चंद्र राशि और नक्षत्र के आधार पर 8 कूटों वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी का मूल्यांकन किया जाता है. इसके कुल 36 अंक या गुण होते हैं, जिसमे से यदि 18 गुण यानी की 50 फीसदी मिल जाने से विवाह हो सकता है, लेकिन यह मिलान कुंडली के बाकी 11 भावों, चंद्रमा के अलावा अन्य 8 ग्रहों सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु और उनके बलाबल को पूरी तरह नजरअंदाज कर देता है, जोकि इस मिलन को सीमित कर देता है.

कुंडली मिलान में क्या-क्या देखा जाता है?

पत्री मिलान या कुंडली मिलान में दोनों जातकों की संपूर्ण जन्म कुंडली, नवमांश कुंडली और वर्तमान दशाओं का आमने-सामने रखकर विश्लेषण किया जाता है. इसमें कई पहलुओं को देखा जाता है, जैसे कि वैवाहिक भावों का विश्लेषण सप्तम भाव यानी की दोनों में सामंजस्य , अष्टम भाव मांगल्य-आयु, द्वितीय भाव कुटुंब और चतुर्थ भाव सुख की स्थिति तथा पंचम भाव से वंश वृद्धि देखी जाती है .

पुरुष की कुंडली में शुक्र यानी पत्नी का कारक और स्त्री की कुंडली में गुरु यानी पति का कारक की स्थिति और मजबूती देखी जाती है. कुंडली में मांगलिक दोष, सूर्य-राहु का ग्रहण योग, या सप्तम भाव पर क्रूर ग्रहों शनि, मंगल, राहु का प्रभाव आदि जो की विवाह का भविष्य बताते है. विवाह के समय और उसके बाद दोनों की कौन सी महादशा और अंतर्दशा चलने वाली है? यदि दोनों की कुंडली में एक साथ मारक या कष्टप्रद दशाएं आ जाएं, तो जीवन में भारी संघर्ष आता है जोकि विवाह के सुखद अनुभव की मानसिक पीड़ा संघर्ष और कष्टप्रद बना देता है .

कुंडली में गुण मिलना ही काफी नहीं हैं

यदि अष्टकूट मिलान में 36 में से 28 या 32 गुण भी मिल जाएं, तब भी वैवाहिक जीवन बिखर सकता है. इसके कई ज्योतिषीय कारण हैं. उदाहरण के लिये मान लीजिए गुण 30 मिल रहे हैं, लेकिन वर या वधू में से किसी एक की कुंडली के सप्तम भाव में राहु-मंगल का क्रूर योग है, या सप्तमेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में जाकर पीड़ित है. ऐसी स्थिति में अष्टकूट के अच्छे गुण भी उस अलगाव या कलह को नहीं रोक पाते. लग्न कुंडली यदि वृक्ष है, तो नवमांश उसका फल है. कई बार लग्न कुंडली में ग्रह अच्छे दिखते हैं, लेकिन नवमांश कुंडली में जाकर सप्तम भाव का स्वामी नीच का हो जाता है या राहु-केतु के अक्ष में फंस जाता है. विवाह के वास्तविक सुख के लिए नवमांश का मजबूत होना अनिवार्य है.

अष्टकूट मिलान दोनों की आयु या स्वास्थ्य की गंभीर समस्याओं को नहीं पकड़ सकता. यदि एक जातक की कुंडली में अल्पायु योग या गंभीर अस्वस्थता का योग है, तो गुण मिलने के बाद भी वैवाहिक जीवन का सुख बाधित हो जाएगा. विवाह के बाद यदि दोनों पार्टनर्स की कुंडली में मानसिक तनाव, अवसाद या अलगाव कराने वाले ग्रहों की दशाएं जैसे राहु, केतु या पीड़ित शनि की महादशा शुरू हो जाएं, तो आपसी समझ होने के बाद भी परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि रिश्ता टूटने की कगार पर आ जाता है.

विवाह टिकेगा या नहीं, किस पर करता है निर्भर?

कुल मिलाकर अष्टकूट मिलान (गुण मिलान) केवल यह बताता है कि दोनों के मन और स्वभाव में कितनी समानता है, लेकिन विवाह टिकेगा या नहीं, यह पूरी तरह से पत्री मिलान भाव, भावेश, कारक और दशा के सूक्ष्म विश्लेषण पर निर्भर करता है. इसलिए केवल गुण देखकर विवाह का निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है. वहीं, मुनि वशिष्ठ का यह कथन भी बिल्कुल सत्य है… सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेउ मुनिनाथ. हानि, लाभ, जीवन, मरण, जस अपजस विधि हाथ… अर्थात, मुनि वशिष्ठ भरत जी से कहते है. ‘हे भरत! सुनो, होनी यानी भाग्य बहुत बलवान है. हानि-लाभ, जीवन मरण और यश-अपयश ये सब विधाता यानी ईश्वरके हाथ में है.”

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