ग्रेटर नोएडा: 858 करोड़ का ओवर ब्रिज पहली ही बारिश में हुआ क्षतिग्रस्त
उद्घाटन के 15 दिन बाद ही ग्रेटर नोएडा का 858 करोड़ का ओवर ब्रिज पहली बारिश में टूटा। सड़क उखड़ने से निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल। पढ़ें पूरी अपडेट।
यूपी के हाईटेक शहर कहे जाने वाले ग्रेटर नोएडा में बनाया गया रेलवे ओवर ब्रिज पहले ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गया. 15 दिन पहले 858 करोड़ के इस पुल का उद्घाटन हुआ था और लोगों के लिए इसे खोला गया था. इस ओवर ब्रिज की सड़क जगह-जगह उखड़ गई है. लगभग 100 मीटर लंबे हिस्से में सड़क टूटने और कंक्रीट उखड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले दो-तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के बीच फ्लाइओवर की सड़क कई स्थान पर टूट गई है और कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ कर बाहर आ गई है.
पहली बारिश भी नहीं झेल पाया नया ओवर ब्रिज
शहर के लोगों का कहना है कि जिस ओवर ब्रिज को शहर की बड़ी परियोजनाओं में गिना जा रहा था. वह मानसून की पहली बारिश भी नहीं झेल पाया. जिससे फ्लाईओवर निर्माण करने वाली कंपनी पर सवाल खड़े हो रहे हैं. वीडियो वायरल होने के बाद डीएफसीसीएल ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया विभाग की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है. अधिकारियों का दावा है कि अगले एक से दो दिनों के भीतर पूरी सड़क की मरम्मत कर ट्रैफिक के लिए सुरक्षित बना दिया जाएगा.
लंबे इंतजार के बाद मिला था ओवर ब्रिज
130 मीटर रोड पर बने इस रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण लंबे समय से चल रहा था. निर्माण पूरा होने के बाद दो तीन चरणों में तकनीकी निरीक्षण किया गया और लगभग एक महीने पहले इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया था, लेकिन इतनी जल्दी सड़क का उखड़ जाना निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है.
शहर के लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बने फ्लावर की सड़क यदि पहली ही बारिश में टूट जाए तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. वहीं लोगों का यह भी कहना है कि केवल मरम्मत कर देना पर्याप्त नहीं है बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि आखिर निर्माण में ऐसी कौन सी कमी रही, जिसके कारण नया फ्लाइओवर पहली बारिश का सामना भी नहीं कर पाया. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है की मरम्मत के बाद सड़क कितनी टिकाऊ साबित होती है और संबंधित एजेंसी गुणवत्ता को लेकर क्या कार्रवाई करती है.