दिल्ली: सरकारी शिक्षक ने फ्लाईओवर से लगाई छलांग, काम के दबाव का आरोप
दिल्ली के सर्वोदय विद्यालय के शिक्षक ने रानी झांसी फ्लाईओवर से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की। परिवार का आरोप- मेडिकल लीव खारिज होने और काम के भारी दबाव से थे परेशान।
दिल्ली के सर्वोदय विद्यालय के गणित के एक शिक्षक ने बुधवार दोपहर रानी झांसी फ्लाईओवर से कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या करने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उनका इलाज चल रहा है। शास्त्री नगर के रहने वाले आनंद कुमार सरोहा को शुरू में गंभीर हालत में हिंदू राव अस्पताल ले जाया गया। इमरजेंसी में हालत स्थिर होने के बाद उन्हें सेंट स्टीफंस अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां उनका इलाज चल रहा है। गंभीर चोटों के अलावा उनके दोनों हाथों की हड्डियां टूट गई हैं।
बूथ लेवल अधिकारियों के सुपरवाइजर हैं
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, 8 जुलाई को शाम 4:33 बजे बड़ा हिंदू राव थाने को इस घटना की जानकारी मिली। शुरुआती जांच से पता चलता है कि वह अस्थमा के मरीज बताए जाते हैं। अपनी नौकरी की जिम्मेदारियों को लेकर वह काफी मानसिक तनाव में थे। वह सदर बाजार के बूथ नंबर 141-150 की वोटर लिस्ट के एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) का काम कर रहे बूथ लेवल अधिकारियों के सुपरवाइजर हैं।
नहीं मिल रही थी मेडिकल लीव
शिक्षक के परिवार ने उनके सीनियर अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके जीजा विक्रम सिंह तोमर ने बताया कि सरोहा अपनी सेहत की वजह से दस दिन की मेडिकल लीव लेने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी अर्जियों को खारिज कर दिया गया। तोमर ने आरोप लगाया कि उन्हें इतना ज्यादा मानसिक रूप से परेशान किया गया कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें और उन्हें लगा कि मरना ही एकमात्र रास्ता बचा है। परिवार का यह भी कहना है कि खराब सेहत के कारण काम करने में असमर्थ होने के बावजूद सरोहा पर जनगणना का काम पूरा करने का भारी दबाव था।
कूदने से पहले डेटॉल भी पी लिया था
परिवार का आरोप है कि फ्लाईओवर से कूदने से पहले हताशा में सरोहा ने डेटॉल पी लिया था। परिवार के सदस्य अब इस दुखद घटना के कारणों की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। परिजनों ने काम से जुड़ी मानसिक प्रताड़ना और दबाव का हवाला दिया है।
सख्त कार्रवाई की मांग
पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच चल रही है। परिवार उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, जिनकी वजह से ऐसा तनावपूर्ण माहौल बना कि एक शिक्षक को इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा। उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में पारदर्शिता से भविष्य में दूसरे सरकारी कर्मचारियों के साथ ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।