गाजियाबाद: जलभराव से मासूम की मौत, 50 कॉलोनियों में मौत का खतरा
गाजियाबाद में जलभराव के कारण मासूम की मौत। खुले नालों और गड्ढों से शहर की 50 से अधिक कॉलोनियां खतरे में। जानें प्रशासनिक विफलता की पूरी कहानी।
गाजियाबाद के सर्वोदय नगर में तीन साल की मासूम की दर्दनाक मौत के बाद नगर निगम कठघरे में हैं। इस तरह की घटनाएं शहर की 50 से अधिक कॉलोनियां में कभी भी हो सकती है क्योंकि तेज बारिश के बाद इन क्षेत्रों में कई-कई फीट तक पानी भर जाता है। जलभराव के कारण खुले नाले, गड्ढे और टूटे हुए मैनहोल दिखाई नहीं देते।
मूसलाधार बारिश के बाद हर बार सर्वोदय नगर, चरण सिंह कालोनी, आंबेडकर नगर, सुदामापुरी, प्रताप विहार, नंदग्राम, आदर्शनगर, दीनदयालपुरी, हिंडन विहार, अर्थला, मोरटा समेत 50 से ज्यादा कॉलोनियों में जलभराव हो जाता है। कई स्थानों पर पानी कई दिनों तक जमा रहता है। इन स्थानों पर पानी निकासी का साधन नहीं होने से लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।
सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर मंडरा रहा है, क्योंकि जलभराव के बीच खुले नाले, गड्ढे और टूटे हुए मैनहोल दिखाई नहीं देते। आदर्शनगर निवासी सतीश कुमार का कहना है कि हर बारिश के बाद हालात बदतर हो जाते हैं, लेकिन निगम की ओर से स्थायी समाधान की बजाय केवल खानापूर्ति की जाती है। नालों की सफाई समय पर नहीं होने से पानी सड़कों पर फैल जाता है। सर्वोदय नगर निवासी राजेश कुमार का आरोप है कि हर साल बारिश में जलभराव की स्थिति बनती है। निगम में शिकायत के बाद कोई स्थाई हल नहीं होता। विजय नगर निवासी सीमा शर्मा ने बताया कि जलभराव के समय हम अपने बच्चों को अकेले बाहर नहीं निकलने देते। सड़क और नाले में फर्क ही नहीं दिखाई देता। हर समय डर बना रहता है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
निर्माणाधीन सड़कों पर पैदल चलना भी मुश्किल
गाजियाबाद में मानसूनी बारिश ने नगर निगम की व्यवस्था चरमरा दी है। निगम 200 से 250 मिलीमीटर बारिश का अनुमान लगाया रहा है। हालत यह रही कि निर्माणाधीन सड़कों पर कीचड़ की स्थिति पैदा हो गई और लोगों का पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया। विजयनगर के के ब्लॉक में सड़क निर्माण के लिए नाली और रोड को खोद दिया गया है।
औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव से काम ठप
गाजियाबाद में बारिश के लगातार होने से गुरुवार को औद्योगिक क्षेत्रों का कामकाज प्रभावित रहा। कई इकाइयों में कर्मचारी व श्रमिक कम पहुंचे, जिसका असर उनके उत्पादन पर भी पड़ा। वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों की सड़के भी जलमग्न रही। हर तरफ पानी ही नजर आया। गाजियाबाद में 24 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र हैं, जिसमें 12 क्षेत्र यूपीसीडा ने विकसित किए हैं। गाजियाबाद नगर निगम के अपर नगरायुक्त अवनींद्र कुमार ने कहा कि जलभराव की समस्या को देखते हुए झील वाले स्थानों पर पानी निकासी के लिए प्लान तैयार किया जा चुका है। कई स्थानों पर नाले का निर्माण भी शुरू करा दिया गया है।
बिजली के उपकरण खराब
ट्रांस हिंडन में गुरुवार को हुई रिकॉर्ड बारिश ने त्राहिमाम मचा दिया। अधिकांश इलाकों में लोग काम पर नहीं जा पाए। स्थानीय निवासी राजेश चड्ढा ने बताया कि रसोई तक पानी पहुंचने से खाना बनाना भी मुश्किल हो गया। घरों में इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं खराब हो गईं।
क्रेन की मदद से वाहन हटाए
मोदीनगर में दिल्ली मेरठ मार्ग सहित 30 कॉलोनियों में जलभराव हो गया। इसके चलते लोगों को आवागमन में दिक्कत का सामना करना पड़ा। नगर पालिका परिषद द्वारा पानी निकासी का कोई इंतजाम नहीं किया गया। खराब वाहनों को पुलिस ने क्रेन की मदद से सड़क से हटाकर यातायात सुचारु किया।
नाला संकरा करने पर सख्ती
विजयनगर क्षेत्र में जलभराव की शिकायतों पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों के साथ मुख्य नाले का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों पर नाराजगी जताई और पूछा कि नाले की चौड़ाई कम करने की अनुमति किस स्तर से दी गई।