दिल्ली सचिवालय में लगेगा पहला ‘सोलर ट्री’, क्लीन एनर्जी की ओर बढ़े कदम

दिल्ली सरकार सचिवालय में अपना पहला 'सोलर ट्री' लगाने की तैयारी में है। जानें क्या है यह तकनीक, कैसे काम करती है और इसके क्या फायदे हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार क्लीन एनर्जी अपनाने की अपनी योजना को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली सचिवालय की इमारत में एक ‘सोलर ट्री’ लगाने की तैयारी कर रही है। दिल्ली में लगने वाला यह पहला ‘सोलर ट्री’ होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली सरकार के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी इसी सचिवालय में बैठते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी देते बताया कि सचिवालय में सोलर ट्री के सफल इंस्टॉलेशन के बाद इस पहल को पूरी राजधानी में फैलाने की योजना है।

क्या होता है सोलर ट्री?

सोलर ट्री एक तरह का ऐसा फोटोवोल्टिक (PV) पैनल होता है जो सूरज की रोशनी को अधिक से अधिक ऊर्जा में बदलने के लिए पेड़ जैसे स्ट्रक्चर में लगाए जाते हैं। अधिकारियों ने बताया कि पीवी पैनल के अलावा पूरे सोलर सेटअप को पेड़ जैसी आकृति का रूप देने के लिए मेटल फ्रेम, प्लास्टिक और अन्य सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें शामिल इनोवेशन के स्तर के हिसाब से डिजाइन अलग-अलग हो सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सोलर ट्री के पीवी पैनल से सोखी गई सूरज की रोशनी को बिजली में बदला जाता है और इसे स्ट्रक्चर के बेस में लगी बैटरी में स्टोर किया जाता है। साथ ही, पैनल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे घूम सकें और समय के साथ अधिक से अधिक सूरज की रोशनी सोख सकें।

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई शहरों में भी ऐसे सोलर ट्री देखे जा सकते हैं और जल्द ही दिल्ली में भी अपना सोलर ट्री होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार का बिजली विभाग सोलर प्लांट लगाने की योजना पर काम कर रहा है।

सोलर सिस्टम और सोलर ट्री में क्या अंतर?

आमतौर पर छत या जमीन पर लगने वाले सोलर सिस्टम के लिए बहुत ज्यादा चौड़ी जगह की जरूरत होती है, लेकिन सोलर ट्री खड़ी जगह (वर्टिकल स्पेस) का इस्तेमाल करता है। इसके स्ट्रक्चर में बीच में धातु का एक मुख्य हिस्सा (ट्रंक) होता है, जिसमें शाखाओं जैसे हिस्से सही कोण पर निकले होते हैं ताकि उन पर सोलर पैनल लगाए जा सकें।

ये होते हैं फायदे

जगह की बचत : इसके वर्टिकल डिज़ाइन की वजह से जमीन पर बहुत कम जगह घेरकर कई हाई-एफिशिएंसी सोलर पैनल लगाए जाते हैं, जो दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले महानगर के लिए काफी फायदेमंद हो सकते हैं।

सन ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी: सोलर ट्री के कुछ एडवांस्ड डिजाइनों पर चर्चा चल रही है जिनमें स्मार्ट मैकेनिकल पार्ट्स शामिल हैं। ये पार्ट्स पैनल को अपने-आप घूमने में मदद करते हैं, जिससे वे दिन भर सूरज की चाल को ट्रैक कर अधिक से अधिक बिजली बना पाते हैं।

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