भिवानी: दूषित पानी से मिलेगी राहत, पुराने टैंकों की जगह बनेंगे RCC टैंक
भिवानी में खारा पानी मिलने से खराब हो रहे पेयजल पर बड़ी अपडेट। अब पुराने ईंटों के वाटर टैंकों की जगह बनेंगे RCC टैंक। जानें क्या है सरकार की नई योजना।
भिवानी। जिले के पुराने वाटर स्टोरेज टैंकों में भूमिगत खारा पानी रिसकर साफ नहरी पानी में मिल रहा है। इससे पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जनस्वास्थ्य विभाग ने ईंटों से बने ऐसे टैंकों की पहचान कर निदेशालय को जानकारी भेजी है। अब इन ईंटों के वाटर स्टोरेज टैंकों की जगह आरसीसी के टैंक बनाए जाएंगे। सरकार ने इस काम को जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
जलघरों में ईंटों की जगह आरसीसी बेस टैंक बनाए जाएंगे। आरसीसी बेस टैंक बनने के बाद जमीन के नीचे का खारा पानी पेयजल में नहीं मिल पाएगा। भूमिगत जल के रिसाव को रोकने से नहरी पानी दूषित होने से बचेगा। इससे आमजन को शुद्ध और साफ पानी पीने को मिल सकेगा। यह खारे पानी की समस्या केवल उन्हीं क्षेत्रों में है जहां सेम की समस्या है। वहां भूमिगत पानी काफी ऊपर है जो वाटर टैंक की गहराई की वजह से शुद्ध पानी में मिल जाता है।
लवणीय पानी के स्वास्थ्य पर प्रभाव
फिलहाल जलघरों के वाटर टैंकों में लवणीय पानी मिलकर घरों तक पहुंच रहा है। इससे शरीर में पोषक तत्वों और लवणों का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके लगातार सेवन से गंभीर शारीरिक समस्याएं और बीमारियां पैदा हो सकती हैं। पानी में नमक (सोडियम) की अधिक मात्रा ब्लड प्रेशर को बढ़ा देती है। इससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
खारे पानी में नमक का स्तर शरीर की कोशिकाओं से पानी खींच लेता है। इससे व्यक्ति डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है। अत्यधिक सोडियम को फिल्टर करने के लिए गुर्दों पर बहुत दबाव पड़ता है। इससे पथरी या किडनी फेलियर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खारे पानी के ज्यादा सेवन से पेट में सूजन, उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।