हथिनीकुंड बैराज का ग्लेसिस रैम्प हुआ जर्जर, बरसाती सीजन में बढ़ा खतरे का ग्राफ

यमुनानगर का हथिनीकुंड बैराज विभागीय उपेक्षा का शिकार है। बरसाती सीजन में क्षतिग्रस्त रैम्प से बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है, जिसका अब टेंडर जारी हुआ है।

यमुनानगर :  यमुनानगर का हथिनीकुंड बैराज एक बार फिर विभागीय उपेक्षा का शिकार होता दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां बरसाती का सीजन आ चुका है वहीं दूसरी तरफ विभाग बैराज के क्षतिग्रस्त हो चुके (ग्लेसिस) रैम्प का अब टेंडर दे रहा है।  रैम्प में बड़े-बड़े छिद्र हो चुके हैं और सुरक्षा के लिए लगाए गए सरिया बाहर निकल चुके हैं और विभागिया अधिकारिओ ने इसको पूरी तरह से अनदेखा कर दिया।

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बता दे के विभाग द्वारा 140 करोड़ के करीब  लागत से डाया फॉर्म वाल का निर्माण किया गया था, जिसको बनाने में दो से ढाई साल का समय लगा। जब यह डाया फॉर्म वाल बनाई जा रही थी तो अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त हुए ग्लेसिस को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया, जिससे बैराज को  खतरा हो सकता है।

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कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा 
बरसात के सीजन में लाखों क्यूसिक पानी इन रेम्प से होता हुआ निकलेगा और इसे और डैमेज कर सकता है। बैराज में रैंप का जब निरीक्षण किया गया तो देखा गया कि लगभग सभी रेम्प बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि हरियाणा सिंचाई विभाग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर प्रवीण गुप्ता ने कहा कि  टेंडर प्रक्रिया लेट हुई है और अब 3 करोड रुपए में टेंडर दे दिया गया है और बरसाती के बाद इन रैम्पों की रिपेयरिंग कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दो रैंप मुरम्मत करवा ली है बाकी में भी मुरम्मत करवा दी जाएगी।

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टेंडर में ढील हुई:  सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर 
प्रवीण गुप्ता ने कहा कि टेंडर में ढील हुई है, लेकिन इस दौरान हमने इसके दो रैंप मुरम्मत करवा लिए हैं। अगर 2 साल में कोई दिक्कत आएगी तो एजेंसी अपने पैसों से ही उसे मरम्मत करेगी। क्या इस देरी का खामियाजा इलाके के लोगों और बैराज को भुगतना पड़ सकता है। अगर पानी ज्यादा आया तो स्थिति खराब हो सकती है। हालांकि अधिकारी दावा जरूर कर रहे हैं कि इससे कोई ज्यादा नुकसान नहीं होगा। देखना होगा मानसून ठीक-ठाक निपट जाए और इलाके व बैराज को नुकसान ना हो।

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