नोएडा को मिला पहला एयर-कंडीशंड स्काईवॉक, सेक्टर 51 और 52 मेट्रो स्टेशन आपस में जुड़े
नोएडा के सेक्टर-51 और 52 मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाले पहले एयर-कंडीशंड स्काईवॉक की शुरुआत हो गई है। जानिए इसकी लागत और अन्य खासियतें।
नोएडा में लंबे इंतजार के बाद पहला स्काईवॉक आज से यात्रियों के लिए खोल दिया गया है. रक्षाबंधन के मौके पर नोएडावासियों को यह बड़ी सौगात मिली है. करीब 400 मीटर लंबा और L-Shape में बना यह स्काईवॉक सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशनों को आपस में जोड़ता है. इसके जरिए Aqua Line और Blue Line मेट्रो कॉरिडोर के बीच यात्रियों को आने-जाने में आसानी होगी.
पूरी तरह एयर-कंडीशंड है स्काईवॉक
नया स्काईवॉक यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसे पूरी तरह एयर-कंडीशंड बनाया गया है, जिससे गर्मी और उमस के दौरान भी यात्रियों को राहत मिलेगी. पैदल चलने की दूरी कम करने के लिए स्काईवॉक में ट्रैवलटर भी लगाए गए हैं. इसके अलावा यात्रियों की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे और फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए गए हैं. इससे मेट्रो यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक रास्ता मिल सकेगा.
सेक्टर-52 स्टेशन की बाधा भी हटाई गई
स्काईवॉक के निर्माण के दौरान सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के प्रवेश मार्ग में एक बीम बाधा बन रही थी. इस बीम को हटाया गया है, ताकि यात्रियों के लिए स्टेशन में आने-जाने का रास्ता सुगम हो सके. वहीं सेक्टर-51 स्टेशन की तरफ भी निर्माण के दौरान कई तकनीकी दिक्कतें सामने आई थीं. इन्हीं वजहों से स्काईवॉक के डिजाइन में कई बार बदलाव करना पड़ा.
मार्च 2023 में शुरू हुआ था निर्माण
इस स्काईवॉक का निर्माण मार्च 2023 में शुरू किया गया था और इसे करीब एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. हालांकि, कई कारणों से परियोजना में लगातार देरी होती गई. अलाइनमेंट में बदलाव और NGT की निर्माण संबंधी पाबंदियों के कारण काम प्रभावित हुआ. खुदाई के दौरान अंडरग्राउंड मेट्रो केबल मिलने के बाद भी डिजाइन में बदलाव करना पड़ा. शुरुआत में स्काईवॉक को सिंगल पिलर पर बनाने की योजना थी, लेकिन बाद में दो कॉलम वाले सपोर्ट सिस्टम को अपनाया गया.
लागत भी बढ़ी
तकनीकी बदलाव और निर्माण में हुई देरी का असर परियोजना की लागत पर भी पड़ा. शुरुआत में स्काईवॉक की अनुमानित लागत करीब 25 करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर लगभग 33 करोड़ रुपए हो गई. सेक्टर-51 स्टेशन के प्रवेश मार्ग में बीम आने के बाद स्काईवॉक के डिजाइन में एक बार फिर बदलाव किया गया और इसके हिस्से को आगे बढ़ाया गया.
अब धूप-बारिश में नहीं चलना पड़ेगा
स्काईवॉक बनने से पहले सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशनों के बीच यात्रियों के लिए अस्थायी कवर्ड वॉकवे की व्यवस्था थी. निर्माण शुरू होने के बाद इसे हटा दिया गया था. इसके बाद रोजाना हजारों यात्रियों को धूप, बारिश और गर्मी के बीच खुले रास्ते से दोनों स्टेशनों के बीच जाना पड़ता था.
अब एयर-कंडीशंड स्काईवॉक शुरू होने से यात्रियों को मौसम की परेशानी से राहत मिलेगी. साथ ही ऑटो और ई-रिक्शा पर निर्भरता कम होगी. भीड़भाड़ वाले संकरे रास्तों और दुकानों के बीच से गुजरने की परेशानी भी कम होने की उम्मीद है. इस स्काईवॉक के शुरू होने से Aqua और Blue Line के बीच मेट्रो बदलने वाले यात्रियों का सफर पहले की तुलना में ज्यादा आसान और सुविधाजनक हो जाएगा.