हॉकी के जादूगर की जयंती पर विशेष, जानिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले हरियाणा के दिग्गज खिलाड़ी
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर जानिए खेल जगत में हरियाणा के शानदार योगदान और कॉमनवेल्थ व ओलंपिक में चमकने वाले राज्य के स्टार खिलाड़ियों की सफलता की कहानी।
आज हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में देशभर में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जा रहा है। जब भी खेल और खिलाड़ियों की बात होती है, तो देश में हरियाणा का नाम सबसे पहले आता है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक हरियाणा देश की मात्र 2 प्रतिशत आबादी वाला राज्य है, लेकिन खेल जगत में इसका योगदान देश में सबसे अधिक है, जो हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।
🥇 2. कॉमनवेल्थ और ओलंपिक खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों का जलवा, कुल पदकों में रहा बड़ा योगदान
हाल ही में संपन्न हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के 122 सदस्यीय दल में अकेले 24 खिलाड़ी हरियाणा से थे। भारत ने 39 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया, जिसमें से अकेले 11 पदक (7 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य) हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीतकर कुल पदक संख्या का 28 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अपने नाम किया। इसके अलावा लंदन, रियो और टोक्यो ओलंपिक में भी नीरज चोपड़ा, साक्षी मलिक, रवि कुमार दहिया और बजरंग पूनिया जैसे दिग्गजों ने देश का मान बढ़ाया है।
🏆 3. रानी रामपाल से लेकर सविता पूनिया तक, हॉकी में हरियाणा के इन दिग्गजों ने बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
हरियाणा सरकार की खेल नीतियों, मजबूत खेल संस्कृति और अकादमियों के कारण यहां के युवाओं में खेल के प्रति जबरदस्त जज्बा है। हॉकी के क्षेत्र में कुरुक्षेत्र की रानी रामपाल (पूर्व कप्तान), सिरसा के सरदारा सिंह, ‘ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर गोलकीपर सविता पूनिया, संदीप सिंह, संजय कालीरावणा, उदिता दुहान और कोच प्रीतम रानी सिवाच जैसे खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को विजयी बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
🥊 4. बॉक्सिंग और एथलेटिक्स में चमकीं हरियाणा की बेटियां, एशियन गेम्स और ओलंपिक की तैयारी में जुटे खिलाड़ी
ईटीवी भारत के साथ बातचीत में कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेता बॉक्सर नरेंद्र, शॉटपुट गोल्ड मेडलिस्ट शर्मिला धनखड़, बॉक्सर सचिन सिवाच, प्रिया घनघस, प्रीति पवार, जैस्मिन लम्बोरिया और साक्षी चौधरी ने अपने संघर्ष और सफलता के अनुभव साझा किए। इन खिलाड़ियों का अगला मुख्य लक्ष्य आगामी एशियन गेम्स और ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे का मान और अधिक बढ़ाना है।