6 दशक पुरानी आईटीआई इमारत में काम कर रहे कर्मचारी, दीवारों में दरार और जंग लगे सरियों से बढ़ा खतरा
सेक्टर-28 जीआईटीआई के जर्जर भवन की सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों ने की स्ट्रक्चरल ऑडिट और 5 करोड़ के बीमा कवर की मांग।
चंडीगढ़: शहर में पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच सेक्टर-28 स्थित सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (जीआईटीआई) का मामला सामने आया है. संस्थान के कर्मचारियों ने अपने कार्यस्थल की सुरक्षा को लेकर मुख्य सचिव, यूटी चंडीगढ़ को अभ्यावेदन सौंपा है. कर्मचारियों ने भवन का तत्काल स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के साथ जांच पूरी होने तक प्रत्येक कर्मचारी को 5 करोड़ रुपये का समूह जीवन एवं व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर देने की मांग की है.
1960 के आसपास बना था भवन: कर्मचारियों के अनुसार सेक्टर-28 स्थित जीआईटीआई का भवन करीब 1960 के आसपास बनाया गया था. यानी छह दशक से अधिक पुराने इस भवन में आज भी नियमित रूप से प्रशिक्षण गतिविधियां संचालित हो रही हैं. यहां कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में प्रशिक्षु भी रोजाना पहुंचते हैं. कर्मचारियों का कहना है कि इतने पुराने भवन में सुरक्षा की स्थिति की वैज्ञानिक तरीके से जांच जरूरी है.
दीवारों में दरार, सरियों में जंग से बढ़ी चिंता: अभ्यावेदन में कर्मचारियों ने भवन की दीवारों और अन्य हिस्सों में दरारें होने का उल्लेख किया है. इसके अलावा संरचनात्मक सदस्यों के कमजोर होने, छत की सरियों में जंग लगने और कंक्रीट के हिस्से गिरने की आशंका भी जताई गई है. कर्मचारियों के मुताबिक वर्कशॉप में मशीनों के बीच रोजाना प्रैक्टिकल प्रशिक्षण होता है, इसलिए किसी भी संरचनात्मक कमजोरी की स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है.
प्रिंसिपल ने भी उठाया था सुरक्षा निरीक्षण का मुद्दा: कर्मचारियों ने अपने अभ्यावेदन में जीआईटीआई के प्रिंसिपल की ओर से 24 जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र का भी हवाला दिया है. कर्मचारियों के अनुसार इस पत्र में भवन का तत्काल सुरक्षा निरीक्षण और स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की आवश्यकता बताई गई थी. कर्मचारियों का कहना है कि जब संस्थान स्तर पर भी जांच की जरूरत बताई जा चुकी है तो प्रशासन को इसे प्राथमिकता के आधार पर करवाना चाहिए.
“पहले स्ट्रक्चरल ऑडिट हो, फिर तय हो सुरक्षा”: कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांग का उद्देश्य केवल बीमा हासिल करना नहीं है. बीमा भवन की सुरक्षा का विकल्प नहीं है. हमारी पहली मांग स्ट्रक्चरल ऑडिट, सुरक्षा प्रमाणन और जरूरी मरम्मत की है. कर्मचारियों के अनुसार जांच के बाद यदि किसी हिस्से को असुरक्षित पाया जाता है तो वहां आवाजाही रोकने और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था करने की जरूरत होगी.
पानी की सीलन से भी बढ़ी परेशानी: कर्मचारियों ने भवन में लगातार नमी और पानी के रिसाव को लेकर भी चिंता जताई है. उनका कहना है कि पुरानी संरचना में लंबे समय तक बनी रहने वाली सीलन और रिसाव भवन की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं. अगर छत या स्लैब का कोई हिस्सा अचानक कमजोर होकर गिरता है तो कर्मचारियों के साथ प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है.
वर्कशॉप को सुरक्षित जगह शिफ्ट करने की मांग: जीआईटीआई कर्मचारियों ने मांग की है कि जब तक भवन की विस्तृत जांच पूरी नहीं होती, तब तक असुरक्षित माने जा रहे हिस्सों में आवाजाही सीमित की जाए. जरूरत पड़ने पर अस्थायी सहारा देने और वर्कशॉप को किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है. कर्मचारियों के मुताबिक मशीनों और उपकरणों के बीच होने वाली गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा उपायों में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए.
चंडीगढ़ में 250 से अधिक भवनों पर सवाल: जीआईटीआई कर्मचारियों की मांग ऐसे समय आई है जब चंडीगढ़ में कई पुराने भवनों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं. शहर में 250 से अधिक इमारतों को असुरक्षित चिन्हित किया गया है. सेक्टर-20 में 100 से ज्यादा सरकारी मकानों और सेक्टर-29 में 200 से अधिक सरकारी मकानों की जर्जर स्थिति का मुद्दा भी सामने आया है. सेक्टर-7, 8, 9, 17, 21, 22, 34, 37 और 38 में भी पुराने भवनों को लेकर चिंता जताई गई है.
औद्योगिक क्षेत्रों में भी स्ट्रक्चरल सेफ्टी का मुद्दा: इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 में भवन नियमों के उल्लंघन और स्ट्रक्चरल सेफ्टी को लेकर 2,000 से ज्यादा संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं. जुलाई में फेज-2 के एक प्लॉट पर इमारत गिरने से दो लोगों की मौत के बाद पुराने भवनों की सुरक्षा का मुद्दा और गंभीरता से उठाया गया. रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन की जांच में निर्माण और मरम्मत के दौरान पिलर की दीवार हटाए जाने से संरचना कमजोर होने की बात सामने आई थी.
30 से अधिक कर्मचारियों ने किए हस्ताक्षर: जीआईटीआई कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि स्ट्रक्चरल ऑडिट जल्द कराया जाए और भवन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए. साथ ही जांच पूरी होने तक ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए 5 करोड़ रुपये का बीमा कवर उपलब्ध कराया जाए. इसमें ड्यूटी के दौरान दुर्घटना या संरचनात्मक हादसे के कारण मृत्यु और स्थायी पूर्ण विकलांगता को शामिल करने की मांग की गई है. अभ्यावेदन पर 30 से अधिक कर्मचारियों ने हस्ताक्षर किए हैं.