सीएम योगी बोले- बीजेपी सरकार ने उपद्रवग्रस्त यूपी को उत्सवपूर्ण प्रदेश में बदला, अब दंगे हैं अतीत की बात
लखनऊ में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह बोले मुख्यमंत्री योगी- यूपी में अब दंगे अतीत की बात, पुलिस ने बदली प्रदेश की छवि।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (20 सितंबर) को राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए समाजवादी सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने उपद्रवग्रस्त उत्तर प्रदेश को उत्सवपूर्ण प्रदेश के रूप में बदला है. उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में सड़क पर चल रही किसी बेटी के साथ छेड़छाड़ करने की हिम्मत कोई नहीं करता और अगर कोई ऐसा करेगा तो उसे मालूम है कि इसका अंजाम क्या होगा.
उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में नव नियुक्त कर्मियों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के लिए लखनऊ में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने जोर देकर कहा कि पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने ऐसी छवि बनाई है, जिससे अपराधियों के बीच कानून का डर पैदा हुआ है. उन्होंने नवनियुक्त पुलिसकर्मियों से कहा कि वो ऐसी पुलिस का हिस्सा बनने जा रहे हैं, जो प्रदेश के 25 करोड़ लोगों के लिए भरोसे का प्रतीक बन चुकी है.
‘बेटी को परेशान करने की हिम्मत नहीं’
मुख्यमंत्री योगी ने कहा ‘आजकल क्या कोई सड़क पर चलती बेटी को परेशान करने की हिम्मत करेगा? अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे पता है कि इसके क्या परिणाम होंगे. अगर उसे इन परिणामों का पता नहीं है, तो मेरा मानना है कि वह अपने ही हाथों अपनी मौत का फरमान लिख रहा है. उसे अब ये सब समझाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यूपी में लोगों की सोच में जो बदलाव आया है, उसमें यूपी पुलिस का भी योगदान है’.
‘देश में यूपी पुलिस मॉडल की चर्चा’
मुख्यमंत्री ने नव नियुक्त पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा ‘आप सभी को आज उसी बल का हिस्सा बनने के लिए चुना गया है. इसलिए, आपको गर्व से कहना चाहिए कि आप उस पुलिस बल का हिस्सा हैं जो 25 करोड़ लोगों के लिए भरोसे का प्रतीक बन चुका है. जैसा कि आप देख रहे होंगे, पूरे देश में जहां भी शासन के मॉडलों की बात होती है, वहां अब यूपी पुलिस मॉडल की चर्चा होती है’.
‘उत्तर प्रदेश में दंगे अतीत की बात हो गए’
आलोचकों पर तीखा प्रहार करते हुए सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में दंगे अतीत की बात हो गए हैं. उन्होंने कहा ‘लोग पूछते हैं: क्या उत्तर प्रदेश में दंगे नहीं होते, क्या अशांति नहीं होती? मैं उन्हें बताता हूं- नहीं, अब दंगे नहीं होते. हम कभी-कभी दंगे का मॉक ड्रिल करते हैं, ताकि लोग यह न भूलें कि पहले दंगे कैसे होते थे’.
योगी ने 2017 से पहले की सुरक्षा स्थिति से तुलना करते हुए बताया कि कैसे आपराधिक गिरोहों और सांप्रदायिक ताकतों ने एक समय राज्य को पंगु बना दिया था. उन्होंने कहा ‘उत्तर प्रदेश में लगभग हर दूसरे दिन दंगे भड़कते थे और कर्फ्यू महीनों तक चलता था. अलीगढ़ में दंगे, मेरठ में दंगे. मुजफ्फरनगर में छह महीने तक लगातार दंगे होते रहे. आम नागरिकों और व्यापारियों की तो बात ही छोड़िए, चाहे प्रशासनिक अधिकारी हों, पुलिस अधिकारी हों या न्यायपालिका के सदस्य, माफिया उनके लिए भी एक चुनौती था. अगर माफिया का कोई काफिला गुजरता था, तो न्यायिक अधिकारियों के वाहन रोक दिए जाते थे ताकि माफिया पहले निकल सके’.
‘पुलिस ने वह कर दिखाया है जो यूपी में पहले कभी नहीं हुआ’
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा ‘क्या आज कोई गुंडा खुली जीप में हथियार लहराते हुए उत्पात मचा सकता है? क्या आज कोई त्योहार से पहले अशांति फैलाने की हिम्मत कर सकता है? क्या आज उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में कोई दंगों को अंजाम दे सकता है? आज यूपी पुलिस ने यूपी की समग्र छवि को बदलने और उसके कायापलट में अहम भूमिका निभाई है. यूपी पुलिस ने वह कर दिखाया है जो यूपी में पहले कभी नहीं हुआ था’.
सरकारी भर्तियों में भ्रष्टाचार पर बरसे CM
सरकारी भर्तियों में भ्रष्टाचार के लिए पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने बताया कि पुलिस भर्ती प्रणाली खुद भी एक समय व्यापक रूप से बदनाम थी. उन्होंने कहा ‘पहले, परीक्षाओं की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठते थे, परीक्षा पत्र लीक होने के मामले आम थे, और यूपी पुलिस की इतनी बदनामी थी कि कोई परीक्षा में बैठता था तो किसी और को नियुक्ति पत्र मिल जाता था. जिन लोगों ने आवेदन भी नहीं किया था, उन्हें नियुक्ति पत्र थमा दिए गए, जबकि योग्य और वास्तविक आवेदकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. लंबी जांच-पड़ताल हुई, लेकिन नतीजा शून्य रहा’.
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रशासनिक तंत्र में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शी और योग्यता आधारित भर्ती आवश्यक है. उन्होंने कहा ‘जब किसी उम्मीदवार का चयन निष्पक्ष, ईमानदार और पारदर्शी तरीके से होता है, तो यह न केवल व्यक्ति के परिवार के लिए, बल्कि शासन और आम आदमी के लिए भी भरोसे का प्रतीक बन जाता है. 2017 से पहले, मैंने उत्तर प्रदेश की व्यवस्था को बहुत करीब से देखा था और इसका अनुभव भी किया था. उस समय, हमने भर्ती प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं के कारण युवाओं में व्याप्त गहरी निराशा और हताशा को महसूस किया था’.
‘2017 के बाद हुआ बदलवा’
सीएम ने आगे कहा कि 2017 में सत्ता संभालने के बाद, उनके प्रशासन ने बिचौलियों को खत्म करने, पेपर लीक सिंडिकेट को भंग करने और प्रतियोगी परीक्षाओं में संरचनात्मक अखंडता को वापस लाने के लिए व्यापक सुधार शुरू किए. उन्होंने कहा ‘2017 में पदभार ग्रहण करने के बाद, हमने पूरी भर्ती प्रक्रिया में सुधार करने का निर्णय लिया.चाहे वह विभिन्न भर्ती बोर्ड हों, सेवा आयोग हों या शिक्षा के विभिन्न क्षेत्र हों. हमने उन्हें एक साथ लाए और निष्पक्ष, पारदर्शी एवं योग्यता आधारित चयन सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा सेवा आयोग जैसे एकीकृत निकायों का गठन किया’.
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले साढ़े 9 सालों में आया यह व्यापक बदलाव बाहरी नौकरशाहों पर निर्भर रहने के बजाय मौजूदा राज्य तंत्र की कार्य संस्कृति में सुधार करके हासिल किया गया है. उन्होंने कहा ‘जब हम योग्य उम्मीदवारों का चयन करते हैं, तो परिवर्तन कैसे होता है. पिछले साढ़े 9 सालों में उत्तर प्रदेश में जो बदलाव देखने को मिला है, वह इसका एक उदाहरण है. राज्य वही है, हम अपने साथ कुछ भी नया नहीं लाए हैं, और प्रशासनिक पद भी अपरिवर्तित हैं. ऐसा भी नहीं है कि मैं गोरखपुर, दिल्ली या बाहर से अधिकारियों को लाकर उनके माध्यम से राज्य का शासन चला रहा हूं. मानव संसाधन वही है, लेकिन लोगों के नजरिए में बदलाव आया है’.