‘एक मिनट में जो बाहर आ गया वो बच गया…’, यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे के चश्मदीद की जुबानी खौफनाक मंजर
यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे के चश्मदीद यात्री ने सुनाई आपबीती। एक मिनट में फैल गई थी आग, कई लोगों की हुई दर्दनाक मौत।
यमुना एक्सप्रेसवे पर एसी स्लीपर बस में आग लगने की घटना का एक चश्मदीद यात्री सामने आया है। उसने पूरी घटना को अपनी आंखों से देखा। चश्मदीद के मुताबिक बस में बहुत तेजी के साथ आग फैली। एक मिनट में जो यात्री बाहर आ गया, वह बच गया। जो अंदर रह गया, वह जिंदा जल गया।
महोबा के सुगिरा गांव के रहने वाले सुनील उस बस में सवार थे, जो बुधवार की रात यमुना एक्सप्रेसवे पर आग का गोला बनी। सुनील कुमार ने बताया कि वह दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा सुगिरा अपने गांव जा रहे थे। उनके दो दोस्त भी उनके साथ थे। बस में जब आग लगी तो वह सो रहे थे। इसी बीच लोगों ने शोर मचाया कि बस में आग लग गई भागो। वह तुरंत उठे और बाहर की तरफ भागे। एक दरवाजा होने की वजह से उसमें भीड़ लग गई। इमरजेंसी गेट खुला नहीं था। पहले उनका दोस्त विकास निकला, फिर सुनील खुद निकले और उसके बाद उनका एक दोस्त मुकेश बाहर आया।
सुनील ने बताया कि धक्का-मुक्की में वह नीचे गिर गए। उन्हें भी चोट आईं। बस में आग लगने के बाद महज एक मिनट का समय लोगों को बाहर निकलने के लिए मिला। इस बीच जो बाहर निकल आया, वह बच गया और जो अंदर रह गया, वह जिंदा जलकर मर गया। बस में आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर फंसे लोगों को बाहर निकलने का समय नहीं मिला।
सुनील ने बताया कि वह करीब 4:30 घंटे तक घटनास्थल पर रहे। बस उनकी आंखों के सामने धू-धूकर जल रही थी। अंदर फंसे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन उन्हें बाहर निकालना मुश्किल था। दमकल की गाड़ियों की मदद से आग को बुझाया गया। इसके बाद रेस्क्यू टीम बस में अंदर पहुंची और शव बाहर निकाले।
हमीरपुर पहुंचे चाची-भतीजे के शव
एसी स्लीपर बस में जिंदा जले चाची-भतीजे के शव शुक्रवार को राठ स्थित घर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। कुछ देर शवों को घर में रखने के बाद अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। इस दौरान हर शख्स की आंखों में आंसू थे। बस में आग लगने से इंजीनियर मयंक गुप्ता और उनकी चाची सरोज गुप्ता की भी जान चली गई थी। मयंक गुप्ता दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर थे। घर पर ही काम करते थे और कंपनी के बुलाने पर 15 दिन में एक बार दिल्ली जाते थे।
पिता का शव और घायल मां को ले गया बेटा
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में जान गंवाने वाले देवेंद्र भारद्वाज का शव और घायल रेखा भारद्वाज को लेकर उनके बेटे सर्वज्ञ रोहतक रवाना हो गए। बस में आग लगने से देवेंद्र भारद्वाज की जलकर मौत हो गई थी। देवेंद्र भारद्वाज के पैर में रोड पड़ी हुई थी इसकी वजह से वह जल्दी से बाहर नहीं निकल सके और अंदर ही फंसे रह गए थे।
चेन से शिनाख्त हुई
बस में जिंदा जले ओमप्रकाश के शव की पहचान गले में पड़ी चेन से हुई। दुर्घटना में कई शव बुरी तरह झुलस गए थे, जिससे उनकी पहचान करना पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। परिजनों ने ओमप्रकाश की शिनाख्त चेन से की।
सांसत: दमकल की गाड़ी देर से पहुंची
सुनील ने बताया कि बस में आग लगने के कुछ ही देर बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई थी। इसके करीब आधे घंटे बाद दमकल की गाड़ी पहुंची। एक गाड़ी ने आग बुझाने शुरू किया, लेकिन आग पर काबू पाना मुश्किल था। इसके बाद दूसरी गाड़ी पहुंची। दोनों गाड़ियों की मदद से करीब दो घंटे तक आग बुझाने का काम किया। किसी तरह आग को बुझाया गया।
सहयोग: प्रशासन ने यात्रियों को घर भेजा
चश्मदीद ने बताया कि घटना के बाद प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। जेवर एसडीएम भी पहुंचे। इसके बाद बस से बाहर निकले करीब 25 यात्रियों को टोल प्लाजा के समीप एक ढाबे पर ले जाया गया। सभी को चाय-नाश्ता करवाया गया। प्रशासन की तरफ से सभी को उनके घर भेजने की व्यवस्था की गई। किराये के लिए रुपये दिए गए। प्रशासन की टीम ने यात्रियों की पूरी मदद की।
बस के 64 चालान हो चुके
हादसे के बाद बस की फिटनेस और पूर्व में हुई यातायात कार्रवाई भी जांच के दायरे में आ गई है। इस बस के खिलाफ 19 अगस्त तक 64 चालान हो चुके हैं और 18,85,50 रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है। बस का पहला चालान 13 अप्रैल 2023 को हुआ था। बस पर गौतमबुद्ध नगर यातायात पुलिस ने भी चालान किया था। जानकारों के अनुसार अधिक चालान और जुर्माने पर बस के पंजीकरण प्रमाण पत्र और परमिट पर कार्रवाई बनती थी।