करवा चौथ पर छलनी से ही क्यों देखा जाता है चांद? जानिए इसके पीछे का पौराणिक रहस्य और कथा

करवा चौथ पर छलनी से चांद देखने की परंपरा के पीछे भगवान गणेश के श्राप की पौराणिक कथा जुड़ी है। जानें साल 2026 में करवा चौथ की तारीख और इसका धार्मिक महत्व।

करवा चौथ का पर्व हर सुहागिन स्त्री के लिए बेहद पावन और खास होता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। रात के समय आकाश में जैसे ही चांद निकलता है, महिलाएं पूजा की थाली सजाकर अर्घ्य देती हैं। लेकिन इस पूजा का सबसे मुख्य और चर्चित नियम यह है कि कोई भी सुहागिन चांद को सीधे अपनी आंखों से नहीं देखती, बल्कि छलनी की ओट से पहले चांद को और फिर उसी छलनी से अपने पति के मुखड़े को निहारती है। अक्सर लोग इसे सिर्फ प्रेम और समर्पण की रस्म मान लेते हैं, लेकिन इसके पीछे एक बहुत ही गहरा पौराणिक रहस्य और भगवान गणेश के श्राप की कथा जुड़ी हुई है। ‘द्रिक पंचांग’ के अनुसार, साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा।

🐘 गणेश जी ने चंद्रमा को क्यों दिया था श्राप? जानिए पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश कहीं जा रहे थे। उनके गजमुख स्वरूप को देखकर चंद्रमा को हंसी आ गई और उन्होंने गणेश जी के रूप का उपहास उड़ाया। चंद्रमा को अपने सौंदर्य और रूप पर भारी अहंकार था। गणेश जी को चंद्रमा का यह व्यवहार आहत कर गया और क्रोधित होकर उन्होंने चंद्रमा को श्राप दे दिया कि जो भी व्यक्ति चतुर्थी तिथि पर चंद्रमा के दर्शन करेगा, उस पर झूठा कलंक लग जाएगा। जब बाद में चंद्रमा को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने क्षमा मांगी, तो गणेश जी ने उन्हें क्षमा तो कर दिया, लेकिन चतुर्थी पर सीधे चंद्र दर्शन से बचने की सावधानी और परंपरा बनी रही।

🌾 करवा चौथ पर छलनी से ही क्यों देखते हैं चांद और क्या है चतुर्थी तिथि का महत्व?

करवा चौथ का व्रत कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की ‘चतुर्थी तिथि’ को मनाया जाता है। चूंकि भगवान गणेश ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) के दिन चंद्रमा को श्राप दिया था, इसलिए चतुर्थी तिथि पर सीधे चंद्र दर्शन को दोषमुक्त करने के लिए छलनी का प्रयोग किया जाता है। सुहागिन महिलाएं पहले छलनी से चांद को देखकर अर्घ्य देती हैं और फिर उसी छलनी से पति का चेहरा निहारकर उनके दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। यह परंपरा न केवल पौराणिक मान्यताओं का आदर करती है, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक भी मानी जाती है।

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