क्या आप जानते हैं? अंडमान में मौजूद है दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी, जानिए इसके बारे में

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित बैरन द्वीप दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। जानिए इसके भूगोल, इतिहास और वहां घूमने की पूरी जानकारी।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में नारियल के पेड़ों से घिरे खूबसूरत बीच, मीलों तक फैली सफेद रेत, नीला समुद्र और हरियाली वाले आइलैंड की तस्वीर सामने आने लगती है। बंगाल की खाड़ी में मौजूद ये आइलैंड नेचुरल ब्यूटी और रोमांचक पर्यटन स्थलों के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। यहां का शांत वातावरण और समुद्र के बीच बसे छोटे-छोटे द्वीप पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंडमान की पहचान सिर्फ खूबसूरत समुद्र तटों और नीले पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इन द्वीपों पर दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी भी मौजूद है?

📍 कहां स्थित है बैरन द्वीप और कब हुआ था यहां आखिरी बार विस्फोट?

यह अनोखा स्थान ‘बैरन द्वीप’ (Barren Island) है, जो अंडमान सागर में स्थित है। यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी श्री विजय पुरम (पोर्ट ब्लेयर) से करीब 138 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में पड़ता है। ‘इंक्रेडिबल इंडिया’ के अनुसार, यह दक्षिण एशिया का अकेला सक्रिय ज्वालामुखी है और इसमें आखिरी बार साल 2017 में विस्फोट दर्ज किया गया था। यह द्वीप लगभग 3 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है और मुख्य रूप से ज्वालामुखी शंकुओं व राख से ढका है।

🚢 कैसे घूमें बैरन आइलैंड और क्या है यहां की पानी के नीचे की दुनिया?

सक्रिय ज्वालामुखी होने के कारण बैरन द्वीप तक पहुंच काफी सीमित है और यहां जाना केवल अधिकृत नाव यात्राओं के माध्यम से ही संभव है। सुरक्षित दूरी से ज्वालामुखी का दीदार करने के लिए पर्यटक हैवलॉक द्वीप (लगभग 2 से 3 घंटे की यात्रा) या पोर्ट ब्लेयर (लगभग 4 से 5 घंटे की यात्रा) से नाव के जरिए जा सकते हैं। भूवैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं है। ज्वालामुखी खनिजों के कारण यहां का समुद्री इकोसिस्टम बेहद समृद्ध है, जो अनुभवी गोताखोरों (Divers) के लिए कोरल गार्डन और दुर्लभ समुद्री प्रजातियों को देखने का एक बेहतरीन ठिकाना बनाता है।

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