इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरी की क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर बहस, 10 साल की सजा को दी गई है चुनौती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के दो पैन कार्ड मामले में क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान तथा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान के चर्चित दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच के समक्ष दोनों पक्षों की लंबी बहस संपन्न होने के बाद अदालत ने इस क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में रामपुर कोर्ट द्वारा पहले ही सजा को बढ़ाकर 10 साल किया जा चुका है, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
🏛️ सजा बढ़ाने की मांग को लेकर राज्य सरकार ने भी दाखिल की है याचिका, कोर्ट ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी एक क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल की गई है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को बढ़ाकर उम्रकैद (आजीवन कारावास) में बदलने की मांग की गई है। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों—आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान के अधिवक्ताओं को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पिछले 25 सितंबर को दोनों नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था, जिसके बाद से सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई चल रही है।
🔍 गलत तरीके से फंसाने का आरोप: दिसंबर 2019 में बीजेपी नेता ने दर्ज कराई थी शिकायत
आजम खान की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वे लंबे समय से जेल में हैं और उन्हें इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120बी के तहत साजिश के तहत झूठा फंसाया गया है, जबकि उनकी संलिप्तता का कोई पुख्ता सबूत नहीं है। आजम ने अपनी 10 साल की सजा और अब्दुल्ला आजम ने अपनी 7 साल की सजा को चुनौती दी है। यह पूरा मामला दिसंबर 2019 का है, जब भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अब्दुल्ला आजम के पास चुनाव लड़ने के लिए अलग-अलग जन्मतिथि वाले दो अलग-अलग पैन कार्ड मौजूद हैं।