ग्रेटर नोएडा PNB में करोड़ों का गबन; महिला ऑफिस असिस्टेंट दीपांशी निकली मास्टरमाइंड, 8 पर केस दर्ज

ग्रेटर नोएडा के पंजाब नेशनल बैंक में करोड़ों के गबन का खुलासा हुआ है। महिला ऑफिस असिस्टेंट दीपांशी को मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए 8 लोगों पर केस दर्ज किया गया है।

ग्रेटर नोएडा । ग्रेटर नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा में करोड़ों रुपये के बड़े गबन का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बैंक की एक महिला ऑफिस असिस्टेंट एवं सब-स्टाफ दीपांशी को इस पूरे घोटाले की मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। बैंक प्रबंधन की ओर से मुख्य मुख्य प्रबंधक अजय कुमार पांडे ने गाजियाबाद स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए महिला कर्मचारी समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।

📍 कौन है मुख्य आरोपी दीपांशी? साकीपुर गांव की रहने वाली है बीटेक पास युवती

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी दीपांशी ग्रेटर नोएडा के साकीपुर गांव की रहने वाली है।

  • दबदबा और कार्यशैली: बीटेक की पढ़ाई कर चुकी दीपांशी बैंक में अपनी क्षमता से ऊपर मैनेजर तक की सीट पर बैठकर काम करती थी। वह कंप्यूटर चलाने में बेहद माहिर थी और मिनटों में ग्राहकों के लोन पास करवा देती थी।

  • स्थानीय चर्चा: हालांकि, स्थानीय लोगों और खाताधारकों का कहना है कि इतने बड़े फर्जीवाड़े में अकेले एक छोटी कर्मी का हाथ होना मुमकिन नहीं है, इसके पीछे बैंक मैनेजर और उच्च स्तर के अधिकारियों की संलिप्तता हो सकती है तथा महिला कर्मी को केवल ‘मोहरा’ बनाया जा रहा है।

🔍 ऐसे हुआ करोड़ों के इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

इस पूरे घोटाले का खुलासा तब हुआ जब बैंक की एक ग्राहक संगीता अपने पति और बेटी के साथ ब्रांच में अपनी पासबुक अपडेट कराने पहुंचीं:

  • संदिग्ध ट्रांजेक्शन: पासबुक में उन्हें 16 सितंबर 2026 को उनके खाते से तीन ऐसे अज्ञात ट्रांजेक्शन मिले, जिनकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत शाखा प्रबंधक से करनी चाही, लेकिन उस समय मैनेजर मौजूद नहीं थीं।

  • दीपांशी की सफाई: उस दौरान दीपांशी ने उनसे बात की और ट्रांजेक्शन को सही साबित करने का प्रयास किया। जब ब्रांच मैनेजर ने दीपांशी से पूछताछ की, तो उसने अजीबोगरीब दलील दी कि ग्राहक ने पति से फोन पर बात कर संपत्ति में निवेश के लिए रकम आशुतोष पाठक के खाते में ट्रांसफर की है।

  • बैंक का शक गहराया: जब बैंक ने इन तीनों ट्रांजेक्शन से जुड़े मूल दस्तावेज और वाउचर खंगाले, तो वे बैंक रिकॉर्ड में सिरे से गायब मिले, जिसके बाद बैंक प्रबंधन का माथा ठनक गया।

📱 मोबाइल अलर्ट बंद कर छिपाया गया लेनदेन; एफडी (FD) में भी गड़बड़ी

शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि सोची-समझी साजिश के तहत कुछ ग्राहकों के खातों के मोबाइल अलर्ट या तो बंद कर दिए गए थे या उनमें छेड़छाड़ कर नंबर बदल दिए गए थे, ताकि खातों से पैसे कटने का तुरंत पता न चल सके:

  • एफडी में फर्जीवाड़ा: बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) योजनाओं में भी भारी गड़बड़ियां मिली हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि कई एफडी खातों में मुख्य आरोपी आशुतोष पाठक और अन्य लोगों को अवैध रूप से संयुक्त खाताधारक (Joint Holder) बना दिया गया था और एफडी से मिलने वाले पैसों के रिटर्न खाते की जानकारी बदल दी गई थी।

  • तीन साल पुराना फर्जीवाड़ा: बैंक अधिकारियों का मानना है कि पिछले करीब तीन वर्षों से यह संदिग्ध खेल चल रहा है। एसीबी (ACB) से पूरे मामले की आपराधिक जांच की मांग की गई है।

💰 खाताधारकों का धरना जारी; बैंक ने कुछ लोगों के पैसे लौटने किए शुरू
  • रकम वापसी का दावा: बढ़ते विरोध के बीच पीएनबी प्रबंधन ने दावा किया है कि तीन खाताधारकों के 43 लाख रुपये वापस कर दिए गए हैं। शुरुआती चरण में 20 लाख से कम राशि वाले पीड़ितों के पैसे लौटाए जा रहे हैं, इसके बाद बड़ी रकम वालों का भुगतान होगा।

  • एलडीएम की जांच और प्रदर्शन: मामले की गंभीरता को देखते हुए लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (LDM) ने शुक्रवार को बैंक पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है, वहीं न्याय की मांग को लेकर आक्रोशित खाताधारकों का बैंक शाखा के बाहर धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है।

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