Bhiwani Acid Attack: पिता ने बेटी पर डाला था तेजाब, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की साकेत कोर्ट में ट्रांसफर किया मुकदमा; तिहाड़ जेल भेजा जाएगा आरोपी

भिवानी में 17 वर्षीय बेटी पर एसिड अटैक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पीड़िता की गंभीर हालत को देखते हुए मुकदमे को दिल्ली की साकेत अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है। आरोपी पिता को भिवानी से तिहाड़ जेल शिफ्ट करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।

भिवानी। सदर पुलिस थाना क्षेत्र के एक गांव में 17 वर्षीय नाबालिग पर तेजाब डालकर हत्या की कोशिश के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए आपराधिक मुकदमा दिल्ली की साकेत अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में पीड़िता के लिए भिवानी आकर मुकदमे की कार्यवाही में भाग लेना लगभग असंभव है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष पीड़िता की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि घटना में नाबालिग को गंभीर चोटें आई थीं जिनमें आंख को भारी नुकसान भी शामिल है। उसका इलाज दिल्ली के मैक्स अस्पताल और श्रॉफ आई सेंटर में चल रहा है। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि पीड़िता अपनी मां को खो चुकी है और उसकी नाजुक स्वास्थ्य स्थिति के कारण भिवानी जाकर सुनवाई में शामिल होना उसके लिए बेहद मुश्किल है।

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि यदि मुकदमा भिवानी में जारी रहा तो पीड़िता के लिए प्रभावी रूप से कार्यवाही में भाग लेना संभव नहीं होगा। सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से आरोपियों के परिवार द्वारा दबाव और धमकी दिए जाने की बात भी कही गई। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि भिवानी सदर थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा सेशन ट्रायल दिल्ली की साकेत अदालत में स्थानांतरित किया जाए। साथ ही साकेत के प्रधान जिला न्यायाधीश को मामले को शीघ्र उपयुक्त अदालत को सौंपने का निर्देश दिया।

अदालत ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया कि आरोपी को भिवानी जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल या किसी अन्य उपयुक्त जेल में स्थानांतरित किया जाए और चार सप्ताह के भीतर इस आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए।

नाबालिग के चेहरे पर तेजाब डाल पिता ने आंगन में बने हौद में फेंक तेज कर दिया टीवी का म्यूजिक

सदर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव में चार अगस्त 2025 को दिल दहला देने वाली घटना हुई थी। जिसमें पिता ने अपनी 17 वर्षीय 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग बेटी पर एसिड अटैक करने के बाद उसे घर के आंगन में बने पानी के हौद में डाल दिया और फिर उसका ढक्कन बंद कर उस पर खुद खड़ा हो गया। बेटी की चिल्लाने की आवाज बाहर न जाए इसके लिए उसने घर के टीवी की आवाज भी तेज कर दी। हालांकि पिता की इस करतूत की भनक पड़ोसी को लग गई। पड़ोसी ने लड़की को पिता के चंगुल से बचाकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। मामले में गांव का कोई व्यक्ति कुछ बताने के लिए सामने नहीं आया तो बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा ने इस मामले की शिकायत सात अगस्त को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दी। मानवाधिकार आयोग के कड़ा संज्ञान लेने के बाद सदर थाना पुलिस हरकत में आई और आठ अगस्त को आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

बड़ी बहन के साथ हुए घिनौने अपराध का छोटा भाई चश्मदीद गवाह

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक मामला पहुंचाने वाले सुशील वर्मा ने बताया कि बड़ी बहन पर एसिड अटैक के मामले में उसका 15 वर्षीय छोटा भाई चश्मदीद गवाह है। भाई नौवीं कक्षा में पढ़ता था और बहन 12वीं की छात्रा थी। पिता की इस घिनौनी करतूत के बाद नाबालिग भाई भी डरा सहमा था। सुशील वर्मा ने कहा कि गांव में कोई भी इस मामले में सामने नहीं आया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद ग्रामीणों से अपील है कि इस मामले में खुलकर सामने आए और पुलिस की मदद कर आरोपी को उसके अंजाम तक पहुंचाएं।

मां की हो चुकी थी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

इस घिनौने अपराध की शिकार पीड़िता की मां की भी कई वर्ष पहले संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी थी। मां की मौत के बाद उसके पिता को इंश्योरेंस का काफी पैसा मिला था। हालांकि उस समय पत्नी की मौत को हादसा बताकर मुआवजा लेने की चर्चाएं भी सामने आई थीं लेकिन कोई शिकायत न होने के कारण मामला पुलिस तक नहीं पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सराहनीय है। भिवानी में नाबालिग लड़की पर पिता द्वारा एसिड अटैक का यह मामला बहुचर्चित रहा था। इस मामले में बाल कल्याण समिति की तरफ से भी पीड़िता को जो आर्थिक मदद मिलनी चाहिए थी, समय पर नहीं मिली। उसका नाबालिग भाई इस मामले में चश्मदीद है इसलिए उसे भी केस की गंभीरता को देखते हुए संरक्षण मिलना बेहद जरूरी है।

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