शेयर बाजार में रिकॉर्ड उछाल: सेंसेक्स 2000 अंक चढ़ा, निवेशकों के ₹13 लाख करोड़ बढ़े

भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी! ईरान-अमेरिका युद्ध खत्म होने की उम्मीदों से सेंसेक्स 2000+ और निफ्टी 550 अंक उछला। निवेशकों की संपत्ति ₹13 लाख करोड़ बढ़ी।

बुधवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में जबरदस्त उछाल आया. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 2.5 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली. ईरान-अमेरिका-इजरायल वॉर के जल्द खत्म होने की उम्मीदों और दूसरे कई कारणों से निवेशकों का उत्साह बढ़ा. सुबह 10:06 बजे, सेंसेक्स 2,000 से ज़्यादा अंकों की बढ़त के साथ दिन के सबसे ऊंचे स्तर 73,937 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 में 550 से ज्यादा अंकों की बढ़त हुई और यह 22,900 के स्तर से ऊपर कारोबार करने लगा. नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत में बाजार में तेजी (बुल रन) लौटने से BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग 13 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 425 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया.

सेंसेक्स में शामिल सभी 30 शेयर हरे निशान में खुले. इनमें ट्रेंट सबसे आगे रहा और 7 फीसदी से ज्यादा की तेजी दिखाई. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) में लगभग 6 फीसदी का उछाल आया, जबकि बजाज फाइनेंस, अडानी पोर्ट्स, इंडिगो, L&T, M&M, इटरनल, एक्सिस बैंक, मारुति सुजुकी, SBI और HDFC बैंक के शेयरों में लगभग 3-5 फीसदी की बढ़त हुई.

NSE पर सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे थे. इनमें निफ्टी PSU बैंक, निफ्टी मीडिया, निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑटो में 3 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली. शेयर बाजार में लगभग 2,671 शेयरों में तेज़ी आई, जबकि 92 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई और 49 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ. यह तब हुआ जब बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलाटिलिटी) को मापने वाला इंडिया Vix सुबह के समय लगभग 11 फीसदी गिरकर 24.94 पर आ गया.

ईरान-अमेरिका वॉर में तनाव कम होने की उम्मीदें

निवेशकों को अब इस बात की उम्मीद तेजी से बढ़ रही है कि यह भयंकर युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि देश दो से तीन हफ्तों के भीतर ईरान पर अपने सैन्य हमले खत्म कर सकता है, और इस संघर्ष को शांत करने के लिए तेहरान को किसी सौदे की शर्त पूरी करने की जरूरत नहीं है. ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि हम बहुत जल्द वहां से निकल जाएंगे.

इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि देश के पास इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने की “ज़रूरी इच्छाशक्ति” है, लेकिन वह इस बात की गारंटी चाहता है कि यह संघर्ष दोबारा न हो. पेजेश्कियन के कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार, उन्होंने यूरोपीय यूनियन के अध्यक्ष के साथ फोन पर हुई बातचीत में तेहरान की एक अहम मांग को दोहराते हुए कहा कि हमारे पास इस संघर्ष को खत्म करने की ज़रूरी इच्छाशक्ति है, बशर्ते कि जरूरी शर्तें पूरी हों — खासकर वे गारंटियां जो इस आक्रामकता को दोबारा होने से रोकने के लिए जरूरी हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि वॉशिंगटन को ईरान वॉर का “अंतिम पड़ाव” नजर आ रहा है — जो अब अपने पांचवें हफ्ते में है — और इस संघर्ष के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका को NATO के साथ अपने संबंधों पर फिर से विचार करना होगा. यह ऐसे समय में सामने आया है जब यह युद्ध, जो अब अपने 5वें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और जिसने तेल की कीमतों में आग लगा दी है, मार्च में वैश्विक बाज़ारों को हिलाकर रख दिया था.

ग्लोबल मार्केट में तेजी

तनाव कम होने की उम्मीदों के बाद, ग्लोबल मार्केट में जबरदस्त तेज़ी आई. सोमवार को वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के बाद अमेरिका के तीनों बड़े इंडेक्स में तेजी आई. रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सलाहकारों से कहा है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने को तैयार हैं, भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ज्यादातर बंद ही रहे.

S&P 500, Nasdaq और Dow Jones Industrial Average ने मई 2025 के बाद से एक दिन में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की. मंगलवार को S&P 500 में करीब 3 फीसदी की उछाल आई, जबकि टेक-हैवी Nasdaq में करीब 4 फीसदी की बढ़त हुई. वहीं, Dow Jones Industrial Average में 2.5% की तेजी आई.

बुधवार को एशियाई मार्केट में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली. जापान का Nikkei 4 फीसदी से ज्यादा चढ़ा और दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 7 फीसदी उछला. चीन का Taiwan Weighted 4 फीसदी से ज्यादा चढ़ा और Shanghai Composite में 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त हुई, जबकि हॉन्गकॉन्ग के Hang Seng में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई. यूरोपीय मार्केट पिछले सेशन में बढ़त के साथ बंद हुए. UK का FTSE, फ्रांस का CAC और जर्मनी का DAX 0.6 फीसदी तक चढ़े.

वैल्यूएशन में राहत

आज की जबरदस्त तेजी मार्च में हुई भारी बिकवाली के बाद आई है, जिसने भारतीय शेयर बाज़ारों से बड़ी रकम साफ कर दी थी. मार्च में Nifty करीब 11 फीसदी गिर गया था, क्योंकि तेल से भरपूर मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा. इससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया और जानकारों ने भारत की मैक्रोइकोनॉमिक्स पर इसके असर को लेकर सवाल उठाए.

तेज गिरावट के बाद, कुछ विश्लेषकों ने बताया कि Nifty अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे गिर गया है. यह इस बात का संकेत हो सकता है कि अब वैल्यूएशन पहले के मुकाबले ज्यादा सही स्तर पर हैं. Elara Securities ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि ऐतिहासिक रुझानों से पता चलता है कि बेंचमार्क इंडेक्स Nifty में अब और ज़्यादा गिरावट की गुंजाइश कम है.

इस घरेलू ब्रोकरेज फर्म ने पिछले 25 सालों में हुए सात बड़े भू-राजनीतिक संघर्षों के दौरान के डेटा का हवाला दिया. फर्म ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के समय Nifty में आमतौर पर करीब 10 फीसरी तक की ही गिरावट देखने को मिलती है. इसलिए, ऐतिहासिक रुझानों के आधार पर कहा जा सकता है कि मार्च में 11 फीसदी की भारी गिरावट के बाद, अब बेंचमार्क इंडेक्स में और ज़्यादा गिरावट की संभावना कम है.

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि युद्ध की शुरुआत के बाद से बाजार में आई गिरावट ने निफ्टी के वैल्यूएशन को उचित स्तरों पर ला दिया है. उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी अब लगभग 19 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत 22.4 गुना से कम है.

बॉन्ड यील्ड में गिरावट

पहले तेजी से उछाल देखने के बाद US बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई. बेंचमार्क 10-साल का यील्ड, जो तब गिरता है जब ट्रेजरी की कीमतें बढ़ती हैं, फिसलकर 4.3 फीसदी पर आ गया. यह लगातार दूसरे सत्र में गिरावट है. US दो-साल का यील्ड, जो ब्याज दर की उम्मीदों को दिखाता है, 3 bps गिरकर 3.77% पर आ गया. यह तब हुआ जब मार्च में बॉन्ड यील्ड ने तीन महीने से ज़्यादा समय में अपनी सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की थी.

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