Identity Theft Case: सेना के पूर्व जवान के साथ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए कई लोन

भिवानी में सेना के सेवानिवृत्त जवान के साथ पहचान की चोरी का मामला। फर्जी केवाईसी दस्तावेजों पर 15 लोन और क्रेडिट कार्ड खाते संचालित करने का खुलासा। पुलिस जांच में जुटी।

भिवानी। गांव बड़दू पूर्ण निवासी एवं भारतीय सेना के सेवानिवृत्त जवान परमजीत सिंह के नाम पर फर्जी केवाईसी दस्तावेज तैयार कर वर्ष 2005 से 2018 के बीच विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों में 15 लोन एवं क्रेडिट कार्ड खाते संचालित करने का मामला सामने आया है. शिकायत पर पुलिस ने पहचान की चोरी और धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

⚠️ पीड़ित का आरोप: कभी नहीं रहा दिल्ली, नहीं लिए कोई लोन या क्रेडिट कार्ड

पीड़ित का आरोप है कि इस फर्जीवाड़े से लाखों रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी हुई है. शिकायत के अनुसार परमजीत सिंह गांव बड़दू पूर्ण के स्थायी निवासी हैं जबकि जिन दिल्ली के पतों का उपयोग इन खातों को खोलने में किया गया वहां वह कभी नहीं रहे. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी इन खातों का संचालन नहीं किया और न ही किसी बैंक या वित्तीय संस्था से इस प्रकार का कोई ऋण या क्रेडिट कार्ड लिया.

🔍 फर्जी दस्तावेजों और सिबिल रिपोर्ट में गड़बड़ी, पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

शिकायत में कहा गया है कि अज्ञात आरोपियों ने फर्जी केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों में खाते खुलवाए. शिकायतकर्ता के अनुसार इन दस्तावेजों का उनके वास्तविक सरकारी पहचान पत्रों से कोई मेल नहीं है. इतना ही नहीं सिबिल रिपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि भी उनके वास्तविक दस्तावेजों से अलग है जिससे फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका और मजबूत हो गई है. लोहारू थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सत्यनारायण ने बताया कि मामले की शिकायत प्राप्त हुई है. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

🏦 लोन लेने पहुंचे तो खुला फर्जी खातों और वित्तीय धोखाधड़ी का राज

परमजीत सिंह ने बताया कि उन्हें पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी तब मिली जब वह एक बैंक में लोन लेने पहुंचे. बैंक मैनेजर ने उनका सिबिल रिकॉर्ड जांचा जिसमें उनके नाम पर पहले से 15 लोन और क्रेडिट कार्ड खाते संचालित होने तथा उन पर भारी बकाया राशि दर्ज होने का खुलासा हुआ. इसके बाद उन्होंने सिबिल रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराई जिसमें बड़े स्तर पर पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी का पता चला.

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